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बिहार में बुलडोजर से मटकोर की रस्म, कुदाल की जगह JCB से मिट्टी कोड़ाई

BETTIAH: बेतिया में हुई एक शादी की चर्चा पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल मटकोर की रस्म के लिए मिट्टी कुदाल से घर की बेटियां खोदती है। लेकिन बेतिया में कुदाल की जगह ज

बिहार में बुलडोजर से मटकोर की रस्म, कुदाल की जगह JCB से मिट्टी कोड़ाई
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

BETTIAH: बेतिया में हुई एक शादी की चर्चा पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल मटकोर की रस्म के लिए मिट्टी कुदाल से घर की बेटियां खोदती है। लेकिन बेतिया में कुदाल की जगह जेसीबी से मिट्टी कोड़ी गयी। इस दौरान मटकोर की रस्म को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।


बता दें कि बिहार में मरवा और मटकोर का रस्म खास होता है। मटकोर करने के लिए घर की महिलाएं और बहने हाथ में कुदाल लेकर जाती है और उससे मिट्टी खोदती है। लेकिन बेतिया में जेसीबी से मिट्टी खोदी गयी जिसकी चर्चा इलाके में खूब हो रही है। दरअसल मझौलिया के गुरचुरवा वार्ड 9 में रहने वाले आलोक कुमार की एक शादी होनी थी। 


हिन्दू रीति रिवाज से होने वाली शादी के एक दिन पहले मटकोर की रस्म अदा की गई। मटकोर के दिन दूल्हे की बहने कुदाल से मिट्टी  कोड़ने की रस्म करती है। लेकिन मिट्टी कोड़ने में कुदाल का इस्तेमाल नहीं किया गया बल्कि मिट्टी कोड़ने की काम जेसीबी से की गई। जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है। इसे लेकर लोग कई तरह की बात कर रहे हैं। 


दूल्हे आलोक ने बताया कि कुदाल से माटी कोड़ने की प्रथा तो पुराना हो गया है.इसलिए हम नया प्रथा लाए हैं. जो कभी नही हुआ था. शादी से ठीक एक दिन पहले मटकोर में जेसीबी से मिट्टी कोड़ी गई जिसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ लग गयी। सोशल मीडिया पर मटकोर का वीडियो वायरल हो रहा है।  


बता दें कि शादी से पहले मटकोर की रस्म की जाती है। घर की महिलाएं गाजे बाजे के साथ माथे पर दौरा और कुदाल लेकर मैदान में जाती है। जिसमें वर-वधू की बुआ और बहन मिट्टी में गड्ढा खोदती है और पांच सुहागिन महिलाओं के आंचल में डालती है। फिर पानी भरकर सिंदूर, अक्षत, फूल, पान और सुपारी, पैसा रखकर पूजा करती हैं। मटकोर के बाद महिलाएं घर लौटती है और आंगन में पूजा करने के बाद कलश स्थापित करती है। 


जिसके बाद दुल्हा और दुल्हन को हल्दी लगाना शुरू हो जाता है। इसे पूरी विधि-विधान के साथ किया जाता है। यह रस्म विवाह में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि यह रस्म भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह में भी की गई थी। इसलिए इसका महत्व और भी खास माना जाता है। ऐसा करने से नए जोड़े को सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। 


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