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विधानसभा अध्यक्ष को तेजस्वी यादव ने दिया सबूत, विधायकों को पीटने वाले दोषियों को बर्खास्त करने की मांग

PATNA : बिहार विधानसभा में विधायकों की पिटाई के मामले को एक बार फिर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया है. तेजस्वी यादव ने विधानसभा अध्यक्ष को सबूत के साथ पत्र लिखा है और दषियों को बर्खास्त कर

विधानसभा अध्यक्ष को तेजस्वी यादव ने दिया सबूत, विधायकों को पीटने वाले दोषियों को बर्खास्त करने की मांग
Anamika
4 मिनट

PATNA : बिहार विधानसभा में विधायकों की पिटाई के मामले को एक बार फिर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया है. तेजस्वी यादव ने विधानसभा अध्यक्ष को सबूत के साथ पत्र लिखा है और दषियों को बर्खास्त करने की मांग की है. 

तेजस्वी यादव ने पत्र में लिखा है कि'नीतीश सरकार द्वारा राज्य की जनता पर "बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक-2021 थोपने के कम में विपक्ष के माननीय सदस्यों के साथ बर्बर हिंसा का प्रयोग कर सदन के अंदर सैकड़ों पुलिस बल की उपस्थिति में जिस तरीके से विधेयक पारित कराया गया, उसे किसी भी तरह से सामान्य लोकतांत्रिक घटना नहीं माना जा सकता. विपक्ष के निहत्थे माननीय सदस्यगण शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन करते हुए अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर विरोध कर रहे थे तो सत्य को सामने लाने का संविधान प्रदत्त अपने कर्तव्यों का ही तो निर्वहन कर रहे थे, जिसकी वो सदस्य बनते समय शपथ लेते है. वो संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा करने का ही तो प्रयास कर रहे थे. लेकिन सरकार के इशारे घर पुलिस प्रशासन द्वारा लिसा का जो नंगा नाच किया गया यह विशेष पुलिस बल को विशेष अधिकार देने के खतरे का एक झांकी भर है.

विदित हो दिनांक-23.03.2021 को बिहार विधानसभा के अन्दर शर्मनाक घटना घटी एवं जो अपराधिक कृत्य किया गया उसने बिहार विधानसभा की मर्यादा को तार-तार कर दिया. सत्ताधारी पार्टी के माननीय सदस्यों को छोड़, सभी माननीय रादस्यों के निरुद माननीय गृह मंत्री सह-मुख्यमंत्री, बिहार के इशारे पर गंभीर हिंसा और अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, जिसमें अनेक माननीय सदस्य गम्भीर रूप से घायल हो गए. कई माननीय विधायक पीएमसीएच सहित अन्य निजी अस्पतालों में इलाजरत हैं. इनमें से एक माननीय विधायक (मखदुमपुर) श्री सतीश कुमार को तो इतनी बुरी तरह मारा गया कि उनका सर फट गया और पीएमसीएच के आईसीयू में जीवन मौत से संघर्ष करते हुए अभी भी चिकित्सकों की देख-रेख में इलाजरत है. 

माननीय महिला विधायकों के साथ जो अवर्णनीय दुर्व्यवहार किया गया उसने तो लोकतंत्र की सारी स्थापित मर्यादाओं को तार-तार कर दिया जोकि संसदीय लोकतंत्र में न तो कहीं देखा गया और न ही कहीं सुना गया.महोदय, उस दिन सदन में जो असामान्य घटना घटी वह सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला था. सदन में बाहर से आए पुलिस बिल्कुल अराजक गुण्डे की तरह बिना कोई चेतावनी दिए मारपीट, उठा-पटक कर रहे थे. उन्हें कौन निर्देश दे रहे थे और किनके कहने पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया ? साथ ही मारपीट करने, उठाकर फेंकने, जुतों एवं बूटों से उनके सिर और पेट पर गंभीर आधात पहुँचाने के उददेश्य से बार करने, महिला विधायकों को बाल खींच कर मारने, पसीटने उनकी साडी खोलने जैसे जपन्य एवं पृणित कार्य को अंजाम किसके आदेश पर दिया गया. माननीय सदस्यों के साथ पुलिस का यह कुकुत्य सिर्फ विपक्ष पर ही नहीं बल्कि यह लोकतंत्र  पर ही हमला था.

महोदय, विदित हो कि जिन माननीयों पर अत्याचार किया गया तो राज्य के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से करोड़ो-करोड जनता द्वारा निर्वाचित है. महोदय, आपके संरक्षक रहते यह हमला सिर्फ माननीय सदस्यों पर ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के मंदिर पर किया गया हमला है. महोदय यह सरकार जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा कर उसे पैरों तले रोदने का प्रयास करती है, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है. विधानसभा को जालियावाला बाग बनाने का प्रयास करने वाल अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग करते हैं.

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