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बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार में दो तिहाई दलित, आदिवासी और पिछड़े: मुख्यमंत्री समेत 6 मंत्रियों में सिर्फ दो सवर्ण, पार्टी ने साधा सामाजिक समीकरण

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार में सामाजिक संतुलन साधते हुए दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों को प्रमुख जगह दी गई है, जहां 6 मंत्रियों में सिर्फ 2 सवर्ण हैं।

BJP Bengal government
© AI
Mukesh Srivastava
5 मिनट

KOLKATA:  9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक सरकार का गठन हुआ। सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ पांच औऱ कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ लिया. बीजेपी ने बंगाल की अपनी पहली कैबिनेट में जाति और क्षेत्र के आधार पर सावधानीपूर्वक सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है. पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में 207 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासन का अंत किया है. आज उसने नई सरकार बनाई, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ पांच मंत्रियों ने शपथ ली. नई कैबिनेट में जातीय और सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व प्रमुखता से दिख रहा है


कैबिनेट में प्रमुख चेहरे और उनका सामाजिक समीकरण

सुवेंदु अधिकारी (मुख्यमंत्री): सुवेंदु बंगाली ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. टीएमसी से बीजेपी में आये सुवेंदु अधिकारी को पार्टी ने ‘जायंट किलर’ के रूप में प्रोजेक्ट किया। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उनकी नियुक्ति से तटीय बंगाल में पार्टी को मजबूती मिलेगी. वहीं, लंबे समय तक टीएमसी के रणनीतिकार रहे सुवेंदु ममता बनर्जी के बची-खुची ताकत को भी समाप्त करने का जिम्मा उठायेंगे. 


दिलीप घोष: सुवेंदु अधिकारी सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने दिलीप घोष पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं और खड़गपुर से विधायक चुने गये हैं. वे बंगाल में बीजेपी का ओबीसी चेहरा माने जाते हैं. पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और हिंदुत्ववादी आधार को संतुष्ट करने में उनकी भूमिका अहम रहने वाली है.


अग्निमित्रा पॉल: अग्निमित्रा पॉल आसनसोल दक्षिण से विधायक चुनी गयी हैं. वह बंगाल की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले कायस्थ समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसके अलावा अग्निमित्रा महिला चेहरा के रूप में बीजेपी की महिला वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हैं. 


अशोक कीर्तनिया: बोंगांव उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये अशोक कीर्तनिया दलितों में शामिल मतुआ समुदाय से आते हैं. बंगाल के उत्तर 24 परगना और नदिया क्षेत्र में मतुआ वोट बैंक बीजेपी की बड़ी ताकत रहा है. पश्चिम बंगाल की लगभग 24 सीटों पर मतुआ समुदाय का वोट निर्णायक है, जो चुनाव परिणामों को सीधे प्रभावित करता है.


खुदीराम टुडू: अनुसूचित जनजाति यानि आदिवासी संताल तबके से आने वाले खुदीराम टुडू बांकुड़ा जिले के रानीबंध से विधायक चुने गये हैं. बंगाल के झारग्राम-जंगलमहल क्षेत्र में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. इस क्षेत्र में बीजेपी को बंपर चुनावी बढ़त मिली है. खुदीराम टुडू आदिवासी समाज और जंगलमहल में बीजेपी की पकड़ को और मजूबत करने के लिए मंत्री बनाये गये हैं. उन्होंने आज पारंपरिक आदिवासी परिधान में मंत्री पद की शपथ ली.


निसिथ प्रामाणिक: केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके निसिथ प्रमाणिक इस दफे मथाभांगा से विधायक चुने गये हैं और आज मंत्री बनाये गये हैं. उन्हें उत्तर बंगाल के राजबंशी समुदाय का प्रमुख नेता माना जाता है. राजबंशी जाति बंगाल का सबसे बड़ा अनुसूचुत जाति समाज है. निसिथ प्रामाणिक राजबंशी जाति के साथ साथ उत्तर बंगाल में बीजेपी को मजबूत करने के लिए मंत्री बनाये गये हैं. 


बीजेपी की क्या है रणनीति

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने लंबे समय से हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण और सामाजिक समीकरण पर काम किया। टीएमसी के मुस्लिम-केंद्रित राजनीति के मुकाबले बीजेपी ने ऊपरी जातियों (ब्राह्मण-कायस्थ), ओबीसी, दलित (मतुआ), आदिवासी और राजबंशी जैसे समूहों को साथ लाने की कोशिश की थी और चुनाव में उसे भारी सफलता मिली. 


बीजेपी की पहली कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन के लिए दक्षिण बंगाल, उत्तर बंगाल और जंगलमहल को प्रतिनिधित्व दिया गया. सामाजिक समावेश के लिए ब्राह्मण, कायस्थ, ओबीसी, मतुआ, आदिवासी और राजबंशी को हिस्सेदारी मिली. वहीं, अग्निमित्रा पॉल के जरिये महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया. 


राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कैबिनेट सामाजिक गणित का प्रतीक है. पार्टी पुराने संगठनात्मक नेताओं को साथ रखते हुए नए चेहरों और पिछड़े-दलित-आदिवासी वर्गों को भी महत्व दे रही है. सुवेंदु अधिकारी सरकार को अब विकास, कानून-व्यवस्था और CAA-एनआरसी जैसे मुद्दों पर फोकस करना है. देखना होगा कि यह जातिगत-क्षेत्रीय संतुलन कितना टिकाऊ साबित होता है और बंगाल की पारंपरिक सांस्कृतिक बहुलता को कैसे संभालती है. हालांकि यह पहला कदम है. आगे पूर्ण कैबिनेट विस्तार में और समीकरण साफ होंगे.

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता