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‘पीड़ितों को तुरंत मिले 15 हजार रुपये की मदद’, बाढ़ को लेकर तेजस्वी यादव की सरकार से मांग

Bihar Politics: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, प्रभावित परिवारों को तत्काल 15 हजार रुपये की सहायता देने और बाढ़-सूखा प्रभावित किसानों के नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की।

Bihar Politics
© Reporter
Mukesh Srivastava
5 मिनट

Bihar Politics: बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ के कारण कई जिलों के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार के स्तर पर मदद तो पहुंचाई जा रही है लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। इसको लेकर सियासत भी खूब हो रही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के साथ ही पीड़ितों को अविलंब 𝟏𝟓 हज़ार की मदद की मांग एनडीए सरकार से की है।



तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, “विगत 𝟐𝟖 दिनों से बिहार बाढ़ की विभीषिका से ही नहीं बल्कि सुखाड की भी मार झेल रहा है। राज्य में 𝟑𝟓 फीसदी से कम बारिश हुई है। भीषण सूखे के कारण राज्य के लाखों हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसलें नष्ट हो रही है। लाखों किसानों का लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा। सूखे का सरकार ने अभी तक कोई आंकलन भी नहीं किया है। किसानों के सामने आजीविका का संकट है। 



दूसरी तरह बिहार विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित है। राज्य के 𝟓𝟎 लाख लोग बाढ़ प्रभावित है लेकिन फिर भी एनडीए की संवेदनहीन सरकार बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध नहीं ले रही। खानापूर्ति के लिए नाम मात्र की गिनी चुनी कुछ सामुदायिक रसोई और राहत शिविर शुरू किए थे वो भी फंड की कमी के चलते 𝟐-𝟒 दिन में ही बंद कर दिए गए।



अब बताइए जरा, जिन गरीबों के मकान गिर गए, जिनके घरों में पानी भरा है, जिनकी दिनचर्या का सामान जैसे जूते-चप्पल, कपड़े और बर्तन पानी में बह गये हैं, जिनके घरों के पास अब भी बदबूदार पानी जमा है वहाँ इस बेशर्म सरकार ने राहत शिविर बंद कर दिए है, बताइए वो बाढ़ पीड़ित इन परिस्थितियों में कहाँ जाएँगे?


सरकार के खजाने पर पीड़ितों का हक़ है लेकिन वो सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया? इस सरकार ने ना कोई राहत दी और ना ही कोई तिरपाल व खाने पीने का सामान?


बिहार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है। 𝟐𝟎𝟏𝟓 में जब हमारी महागठबंधन की सरकार थी तब आपदा प्रबंधन और वित विभाग राजद के पास था तब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय लालू प्रसाद जी की सलाह पर हमने बजट में यह प्रावधान कराया था कि बाढ़-सुखाड़, प्राकृतिक आपदा और संकट के समय राज्य के कुल बजट की चार फीसदी राशि को आकस्मिक निधि के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अब आप बजट के अनुरूप हिसाब लगाइए कि बिहार की आकस्मिक निधि कितनी होगी? कहाँ गई वो राशि?


बिहार के किसानों की समस्याओं को सरकार सुन नहीं रही है। बाढ़ के कारण लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल बर्बाद हुई है। क्षतिग्रस्त फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला है।


मेरे पत्र लिखने और लगातार बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठाने पर दिखावटी तौर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को बिहार भेजा गया। अब उस दौरे पर उन्होंने क्या रिपोर्ट 𝐬𝐮𝐛𝐦𝐢𝐭 की, राहत पुनर्वास तथा नुकसान का कितना आंकलन किया इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है।


प्रधानमंत्री राहत कोष जिसे कोरोना में खत्म कर पीएम केयर्स फंड (𝐏𝐌 𝐂𝐀𝐑𝐄𝐒 𝐅𝐮𝐧𝐝) बनाया गया, उस फण्ड से बिहार की मदद क्यों नहीं की गई?


गोवा, अरुणाचल प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों को मिलाकर उनकी जितनी कुल जनसंख्या है उससे अधिक आबादी बिहार में बाढ़ से प्रभावित है लेकिन गृहमंत्री और प्रधानमंत्री को बिहार की कोई फिक्र नहीं? बिहार की कोई सहायता नहीं? क्या यह बिहार के साथ भेदभाव नहीं है?


बाढ़ के बाद भी 𝟏𝟎𝟎 करोड़ के दीये जला बाढ़ पीड़ितों का जिया जलाने वाले सत्ताधारी संवेदनहीन लोग अब अपनी एक लाख-दो लाख की सैलरी देने की प्रतीकात्मक नौटंकी कर रहे है। इन सबकी सैलरी मिलाकर कुल 𝟐-𝟑 करोड़ रुपए भी जमा नहीं होंगे। क्या 𝟓𝟎 लाख लोगों के लिए ये 𝟐-𝟑 करोड़ रुपए पर्याप्त रहेंगे?


अरे आपके अंदर हिम्मत है तो सरकार से मदद करवाओ ना? डबल इंजन सरकार इसी को कहते है क्या??


बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से है और उन बेचारे की इतनी भी हैसियत नहीं कि प्रधानमंत्री से आग्रह कर सके कि हे हुज़ूर; एक बार मेरे राज्य का दौरा कर लीजिए। बिहार में प्रथम बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है, बिहार से 𝟖 केंद्रीय मंत्री और एनडीए के कुल 𝟒𝟐 सांसद है, 𝟐𝟓𝟎 से अधिक 𝐌𝐋𝐀/𝐌𝐋𝐂 है लेकिन सब नकारे और निकम्मे है। जनता ऐसे नकारे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।


कथित डबल इंजन सरकार बाढ़ पीड़ितों को अविलंब 𝟏𝟓 हज़ार की मदद तथा सुखाड़ और बाढ़ प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण करा उन्हें यथाशीघ्र मुआवजा दें।”

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता