ब्रेकिंग
राजस्व कर्मचारियों को सरकार की लास्ट वार्निंग: 24 घंटे के भीतर योगदान नहीं दिया तो एक्शन तय, ट्रांसफर के बावजूद नहीं कर रहे ज्वाइनगृह मंत्री अमित शाह की चेयरमैनशिप वाली 'परिषद' में डिप्टी सीएम के साथ एक मंत्री को बनाया गया सदस्य, CM सम्राट ने की नियुक्ति खेसारी लाल यादव ने पिता को गिफ्ट की 4 करोड़ की Range Rover SV, भावुक वीडियो हुआ वायरलबिहार में SC-ST अत्याचार मामलों के लिए बनेंगे 19 नए स्पेशल कोर्ट, 171 पदों के सृजन को कैबिनेट की मंजूरीफर्जी आधार कार्ड से भारत में घूम रहा था नेपाली युवक, नाबालिग लड़की को लेकर पहुंचा मैत्री पुल; SSB ने दबोचाराजस्व कर्मचारियों को सरकार की लास्ट वार्निंग: 24 घंटे के भीतर योगदान नहीं दिया तो एक्शन तय, ट्रांसफर के बावजूद नहीं कर रहे ज्वाइनगृह मंत्री अमित शाह की चेयरमैनशिप वाली 'परिषद' में डिप्टी सीएम के साथ एक मंत्री को बनाया गया सदस्य, CM सम्राट ने की नियुक्ति खेसारी लाल यादव ने पिता को गिफ्ट की 4 करोड़ की Range Rover SV, भावुक वीडियो हुआ वायरलबिहार में SC-ST अत्याचार मामलों के लिए बनेंगे 19 नए स्पेशल कोर्ट, 171 पदों के सृजन को कैबिनेट की मंजूरीफर्जी आधार कार्ड से भारत में घूम रहा था नेपाली युवक, नाबालिग लड़की को लेकर पहुंचा मैत्री पुल; SSB ने दबोचा

जातीय जनगणना में फंस सकता है पेंच: नीतीश सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

PATNA: बिहार में अपने स्तर से जातीय जनगणना कराने के सरकारी फैसले पर ग्रहण लग सकता है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गयी है। इस याचिका में संव

जातीय जनगणना में फंस सकता है पेंच: नीतीश सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

 PATNA: बिहार में अपने स्तर से जातीय जनगणना कराने के सरकारी फैसले पर ग्रहण लग सकता है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गयी है। इस याचिका में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए जाति आधारित जनगणना पर रोक लगाने की मांग की गयी है। 


हाईकोर्ट में याचिका

शशि आनंद नाम के व्यक्ति ने जातीय जनगणना कराने के नीतीश सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि ये फैसला न सिर्फ संविधान के खिलाफ है बल्कि इसके लिए आकस्मिकता निधि से 500 करोड़ रूपये खर्च करने का फैसला भी गलत है। 


शशि आनंद की ओर से कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने कहा कि आकस्मिकता निधि के पैसे से जातीय जनगणऩा कराना पूरी तरह गलत है और ये संविधान की धारा का उल्लंघन है। संविधान के अनुच्छेद 267 में आकस्मिकता निधि और उसे खर्च किये जाने का उल्लेख किया गया है। इसके तहत सिर्फ अप्रत्याशित स्थिति में ही आकस्मिक फंड का उपयोग किया जा सकता है लेकिन नीतीश सरकार इसी पैसे से जातीय जनगणना करा रही है।


याचिका में कहा गया है कि बिहार सरकार ने 2 जून 2022 को मंत्रिमंडल की बैठक में आकस्मिकता निधि से 500 करोड रूपये निकाल कर जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया है और फिर 6 जून को राज्यपाल के आदेश से इसकी अधिसूचना जारी की है. ये असंवैधानिक है।