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लालू के बाद अब बोले तेजप्रताप - आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है, जो आर्थिक आधार पर मिले

PATNA : सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण पर की गयी टिप्पणी के बाद अब बिहार में इस मुद्दे पर तल्खी बढ़ती ही चली जा रही है। विपक्ष को बैठे-बिठाए आरक्षण पर 'ब्रह्मास्त्र' हाथ लग ग

FirstBihar
Anurag Goel
3 मिनट

PATNA : सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण पर की गयी टिप्पणी के बाद अब बिहार में इस मुद्दे पर तल्खी बढ़ती ही चली जा रही है। विपक्ष को बैठे-बिठाए आरक्षण पर 'ब्रह्मास्त्र' हाथ लग गया है।आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव का फेवरेट मुद्दा है। इसका फायदा 2015 के चुनाव में लालू प्रसाद उठा चुके हैं।लालू की टिप्पणी के बाद अब उनके लाल तेजप्रताप यादव भी इस मुद्दे पर सामने आ गये हैं। तेजप्रताप यादव ने आर्थिक आधार पर आऱक्षण की मांग को गलत बताते हुए तीखा हमला बोला है। 


तेजप्रताप यादव ने ट्वीट करते हुए आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू किए जाने की बात की जाती है। आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है।आरक्षण सदियों से दलित, पिछड़ों और आदिवासियों के हक मारने वाले  "मनुवाद" को तोड़कर सामाजिक बराबरी का हक दिलाने के लिए एक व्यवस्था है।


इससे पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने आरक्षण को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है।लालू प्रसाद ने ट्वीट किया कि ‘’संविधान निहित बुनियादी अधिकार ही नहीं रहेंगे तो फिर संविधान बचा ही कहां? कल को कोई भाजपाई कहेगा कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और वंचितों का मतदान का अधिकार भी मौलिक नहीं है. मौलिक तो सब मनुस्मृति में लिखा है वह है. तो देश कहां जाएगा? क्या इसका अंदाज़ा है?’’


बता दें कि 2015 विधानसभा चुनाव के पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान का कि आरक्षण के पक्ष और उसके खिलाफ है उनको फिर से विचार करना चाहिए। इस बयान पर लालू प्रसाद ने बीजेपी को घेरा था। लालू प्रसाद ने संघ प्रमुख के बयान के जरिए सियासी माहौल को पूरी तरह बदल दिया था। चुनावी रैली और सभा में बार-बार कहते थे कि अगर किसी में हिम्मत है तो वह आरक्षण खत्म करके दिखाए. इसका महागठबंधन को फायदा हुआ और बीजेपी की हार हो गई थी।




अब एक बार चुनाव के पहले आरक्षण पर सियासत गरमा गयी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए आरक्षण को लेकर बड़ी टिप्पणी की। तमिलनाडु में NEET पोस्ट ग्रेजुएशन रिजर्वेशन मामले में अदालत ने कहा कि आरक्षण कोई बुनियादी अधिकार नहीं है। इसी के साथ अदालत ने तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों द्वारा दाखिल की गई एक याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 



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