Bihar News: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि आज देश में संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। न्यायपालिका देश के संविधान की संरक्षक है और आम नागरिकों को उससे न्याय की उम्मीद रहती है। ऐसे समय में जब लोगों के अधिकारों, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं, तब न्याय मिलने की उम्मीद और भी मजबूत होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की शक्तियां असीमित नहीं हैं। संविधान ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की हैं। यदि किसी संस्था के आदेशों का पालन नहीं होता या नागरिकों को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी होती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। न्याय केवल आदेश जारी करने से सुनिश्चित नहीं होता, बल्कि उन आदेशों के प्रभावी अनुपालन से होता है।
देव ज्योति ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा, बिना उचित सुनवाई के किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने के आरोपों और पत्रकारों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। संविधान में नागरिकों को दिए गए अधिकार केवल किताबों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक संरक्षण भी सुनिश्चित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की मजबूती के लिए रचनात्मक आलोचना और संवैधानिक संवाद जरूरी है। हमारी लड़ाई किसी संस्था को कमजोर करने की नहीं, बल्कि उसे संविधान की भावना के अनुरूप और अधिक सशक्त बनाने की है। देव ज्योति ने कहा कि देश का संविधान सर्वोपरि है। जनता चाहती है कि न्यायपालिका निर्भीक होकर संविधान की रक्षा करे, ताकि आम नागरिक का भरोसा न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र पर कायम रहे।





