PATNA: करीब एक महीने पहले बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा देने वाले बीजेपी के अवधेश नारायण सिंह ने परिषद में बड़े पैमाने पर बहाली में काफी बड़ा खेल किया था? अवधेश नारायण सिंह के कुर्सी से हटने के बाद उनके कार्यकाल में हुई नियुक्तियों की जांच-पड़ताल शुरू हुई है. इसमें सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं. अब हालात ये है कि अवधेश नारायण सिंह के समय हुई नियुक्तियों को बड़े पैमाने पर रद्द किया जा सकता है.
गायब हो गये पहले से बहाल हुए कर्मचारी
दरअसल, अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में बिहार विधान परिषद में निजी सहायक के सात पदों पर बहाली हुई थी. इस पद के लिए सात उम्मीदवारों को आखिरी तौर पर चयनित कर लिया गया था. लेकिन इस नियुक्ति को लेकर कई तरह की चर्चायें हो रही थीं. ऐसे में विधान परिषद के मौजूदा कार्यकारी सभापति रामबचन राय ने चयनित उम्मीदवारों का फिर से शार्ट हैंड टेस्ट लेने का आदेश जारी किया था. निजी सहायक पद पर नियुक्ति के लिए किसी उम्मीदवार के लिए शार्ट हैंड राइटिंग में एक्सपर्ट होना जरूरी होता है.
अवधेश नारायण सिंह के समय बहाल हुए 7 कर्मचारियों के लिए बुधवार को दोबारा परीक्षा का आयोजन किया गया. इस बहाली में पूर्व में चयनित सफल उम्मीदवारों को फिर से शॉर्टहैंड टेस्ट देने के लिए बुलाया गया. मगर कोई भी अभ्यर्थी यह परीक्षा देने नहीं पहुंचा.
जिन सात उम्मीदवारों का पहले से निजी सहायक के पद पर चयन हो रखा है, उनमें स्पृहा सिंह, अमन कुमार, अंजली आनंद, सुमित राज, गुड़िया कुमारी और शिमरण भारती शामिल हैं. पिछले महीने ही इन सभी सातों चयनित उम्मीदवारों को शार्ट हैंड दक्षता की पुनः जांच के लिए नोटिस दिया गया था और उन्हें 4 नवंबर को दुबारा शॉर्टहैंड टेस्ट के लिए बुलाया गया था.
रद्द होगी नियुक्ति
बिहार विधान परिषद सचिवालय में हो रही चर्चा के मुताबिक निजी सहायक भर्ती परीक्षा के पहले से घोषित रिजल्ट को अब रद्द किया जा सकता है. विधान परिषद ने पहले ही सारे चयनित उम्मीदवारों को जानकारी दी थी कि अगर वे फिर से परीक्षा देने नहीं आते हैं तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. इसके बावजूद जिन 7 निजी सहायकों की बहाली हुई थी, उसमें से कोई भी फिर से परीक्षा देने नहीं पहुंचा.
दोबारा परीक्षा में कड़ी निगरानी का था इंतजाम
विधान परिषद सचिवालय ने चयनित उम्मीदवारों की फिर से शॉर्टहैंड टेस्ट के लिए पूरी तैयारी की थी. विधान परिषद के नए भवन में बुधवार को इस परीक्षा का आयोजन होना था. इस हॉल में हाई रेज्योल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगे गये थे. इसके साथ थी तीन लेवल के एक्सपर्ट के साथ साथ मजिस्ट्रेट की तैनाती की गयी थी. विधान परिषध ने ऐसा इंतजाम किया था जिससे कि परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हो सके. लेकिन सुबह 11.30 से दोपहर 1 बजे तक होने वाली इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई उम्मीदवार नहीं पहुंचा.
बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी?
ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि विधान परिषद भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी हुई थी. तभी सात चयनित उम्मीदवारों में से एक भी परीक्षा देने नहीं आया. ना ही उनकी ओऱ से विधान परिषद सचिवालय को कोई सफाई या जानकारी दी गई थी.
अवधेश नारायण सिंह से समय हुई थी बहाली
बिहार विधान परिषद में स्टेनोग्राफर और आप्त सचिव संवर्ग में निजी सहायक के 7 पदों पर नवंबर 2025 में बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके लिए दो चरणों में भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था. पहले चरण की प्रारंभिक परीक्षा में ओएमआर आधारित प्रश्न पूछे गए थे, जिसका रिजल्ट 28 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था.
तीन महीने पहले आय़ा था फाइनल रिजल्ट
निजी सहायक पद के लिए प्रारंभिक परीक्षा में सफल उम्मीदवारों लिए दूसरे चरण की परीक्षा में शार्ट हैंड में दक्षता और हिंदी-इंग्लिश टाइपिंग टेस्ट आयोजित किया गया था. इसके बाद 12 अगस्त 2026 को इस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी किया गया था. इसमें सात अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था.
विधान परिषद सचिवालय इन सातों अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र की जांच कर चुका था और अब ये सारे उम्मीदवार पदस्थापन का इंतजार कर रहे थे. लेकिन इसी बीच विधान परिषद के सभापति की कुर्सी पर बैठे अवधेश नारायण सिंह हटे और नये कार्यकारी सभापति रामबचन राय को इन नियुक्तियों पर शक हुआ. लिहाजा उन्होंने जांच-पड़ताल का निर्देश दिया.
इसके बाद विधान परिषद सचिवालय ने सातो चयनित उम्मीदवारों को दोबारा शार्ट हैंड दक्षता जांच के लिए बुला दिया. लेकिन इससे पहले हुई चयन प्रक्रिया पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गये, जब सातों अभ्यर्थी बुधवार को दोबारा परीक्षा देने नहीं पहुंचे. दोबारा एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों पर अब क्या ऐक्शन होगा, ये विधान परिषद सचिवालय तय करेगा.
फिर से बता दें कि बिहार विधान परिषद में निजी सहायक के पदों पर बहाली की प्रक्रिया सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में पूरी हो चुकी थी. अवधेश नारायण सिंह भारतीय जनता पार्टी कोटे से विधान परिषद के सभापति बने थे. इसी साल सितंबर में विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू के पास चला गया. अवधेश नारायण सिंह ने 28 सितंबर को सभापति पद से इस्तीफा दे दिया था. उनकी जगह जेडीयू कोटे से उपसभापति रामवचन राय अभी कार्यकारी सभापति हैं. रामबचन राय के कार्यकारी सभापति बनने के बाद हो रही जांच से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है.
ब्यूरो रिपोर्ट-फर्स्ट बिहार/झारखंड न्यूज






