Rajya Sabha Chunav: राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार में सियासी हलचल तेज, जीतन राम मांझी ने दिलाई पुराने वादे की याद; जानिए.. क्या बोले?

Rajya Sabha Chunav: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। एनडीए और महागठबंधन के बीच सीटों के गणित और सहयोगी दलों की दावेदारी ने मुकाबला रोचक बना दिया है, जबकि जीतन राम मांझी ने पुराने वादे की याद दिलाई है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Tue, 24 Feb 2026 11:25:51 AM IST

Rajya Sabha Chunav

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Rajya Sabha Chunav: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। देशभर में 37 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में बिहार की ये सीटें अहम मानी जा रही हैं। इन सीटों पर एनडीए के तीन और महागठबंधन के दो सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसी बीच जीतन राम मांझी ने एक सीट को लेकर एनडीए नेतृत्व को पुराने वादे की याद दिलाई है। 


केंद्रीय एमएसएमई मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गठबंधन के घटक के रूप में उन्हें दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने कहा कि वे अंतिम निर्णय तक प्रतीक्षा करेंगे और उन्हें विश्वास है कि नेतृत्व अपने वादे से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी ओर से कोई औपचारिक मांग नहीं की गई है।


इससे पहले चिराग पासवान ने उन अटकलों को खारिज कर दिया था, जिनमें उनकी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा थी। बिहार से जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें रामनाथ ठाकुर, हरिवंश नारायण सिंह, उपेंद्र कुशवाहा, प्रेमचंद्र गुप्ता और अमरेंद्रधारी सिंह शामिल हैं। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार एनडीए के पास 202 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 41 वोट आवश्यक हैं। ऐसे में सभी पांच सीटें जीतने के लिए 205 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। 


दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। यदि AIMIM के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक समर्थन देते हैं तो विपक्ष एक सीट जीतने की स्थिति में आ सकता है। तेजस्वी यादव की पार्टी इस दिशा में सक्रिय बताई जा रही है। हालांकि AIMIM ने भी अपनी शर्तें रखी हैं। सूत्रों के मुताबिक एनडीए के भीतर दो सीटें भाजपा, दो जदयू और एक सीट सहयोगी दल को देने के फार्मूले पर चर्चा चल रही है। सहयोगी दलों में राज्यसभा की सीट को लेकर मंथन जारी है। उपेंद्र कुशवाहा पहले से दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा एलजेपी (आरवी) और हम भी दावेदारी जता रहे हैं।


इसी दौरान जीतन राम मांझी ने राज्य की शराबबंदी नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कानून सही है, लेकिन इसका क्रियान्वयन प्रभावी नहीं है। उनके अनुसार अमीर महंगी शराब पी रहे हैं, जबकि गरीब सस्ती और जहरीली शराब के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कानूनी कार्रवाई में भी गरीब ही अधिक फंसते हैं, जबकि तस्कर अवैध कारोबार से लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता बताई।