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Bihar politics: तेजस्वी और मुकेश सहनी को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश, जानिए.. क्या है मामला?

Bihar politics: बिहार के मुजफ्फरपुर में चुनाव चिह्न 'नाव' के दुरुपयोग को लेकर विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी, उनके भाई संतोष सहनी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

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Viveka Nand
3 मिनट

Bihar politics: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक चुनावी विवाद सामने आया है, जिसमें विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी, उनके भाई संतोष सहनी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला चुनाव चिह्न 'नाव' के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसे भारतीय सार्थक पार्टी ने चुनाव आयोग से प्राप्त किया था। मुजफ्फरपुर की अदालत ने तीनों नेताओं के खिलाफ नोटिस जारी कर उन्हें 6 मई 2025 को व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिवक्ता के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया है।


क्या है आरोप? 

भारतीय सार्थक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने 18 अप्रैल 2024 को मुजफ्फरपुर की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में परिवाद दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश सहनी और संतोष सहनी ने भारतीय सार्थक पार्टी के चुनाव चिह्न 'नाव' का गलत तरीके से उपयोग किया। 


वहीं, आरोप है कि इन नेताओं ने चुनाव चिह्न को वापस करने का दबाव बनाया और इनकार करने पर लोकसभा चुनाव 2024 में इसे महागठबंधन के प्रचार में इस्तेमाल किया। इस मामले में तेजस्वी यादव पर भी आरोप है कि उन्होंने इस कथित फर्जीवाड़े में सहयोग किया और 'नाव' चिह्न का महागठबंधन के प्रचार में इस्तेमाल किया।


कोर्ट का फैसला और आगे की प्रक्रिया 

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने उक्त परिवाद को खारिज कर दिया था, लेकिन इसके बाद सुधीर कुमार ओझा ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में क्रिमिनल रिवीजन वाद दायर किया, जिसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया। एडीजे कोर्ट ने इस मामले में इन नेताओं को नोटिस जारी किया और 6 मई 2025 को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।


बिहार के सियासी गलियारों में हलचल 

इस नोटिस के बाद बिहार के सियासी हलकों में हलचल मच गई है। यह मामला अब राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हो गया है, और सभी की निगाहें इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यह विवाद केवल चुनावी दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में भी नई उथल-पुथल का संकेत दे रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में कोर्ट क्या फैसला देता है और इससे बिहार के राजनीतिक माहौल पर क्या असर पड़ता है।

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