Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन और नेतृत्व द्वारा कथित तौर पर अनदेखी किए जाने से नाराज बिहार कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। आगामी 8 सितंबर को बिहार से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय 'इंदिरा भवन' के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।
नाराज नेताओं का मुख्य निशाना बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम हैं। प्रदर्शन की तैयारी कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए प्रदेश संगठन के शीर्ष पदाधिकारी जिम्मेदार हैं।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। पार्टी महज 6 सीटों पर सिमट गई, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम को भी अपनी सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस के सदस्य और वरिष्ठ नेता आनंद माधव ने कहा कि बिहार के नेता लंबे समय से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि नवंबर 2025 से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिल पाया।
आनंद माधव के अनुसार, 3 नवंबर 2025 को उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और अशोक गहलोत से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी थीं। उस दौरान मांगों पर ध्यान देने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में नेताओं को धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
8 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन में बिहार कांग्रेस के कई पूर्व पदाधिकारी, नेता और कार्यकर्ता शामिल होने की तैयारी में हैं। इनमें बिहार इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष जमाल अहमद और राजकुमार राजन, AICC सदस्य नागेंद्र पासवान, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, पूर्व सचिव बी. अख्तर और पूर्व विधायक अनिल कुमार सिंह सहित कई नेता शामिल हैं।
वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले नेता और कार्यकर्ता पार्टी के समर्पित सदस्य हैं और हाईकमान को उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर होगा कि पार्टी नेतृत्व और नाराज नेताओं के बीच बातचीत के जरिए इस समस्या का समाधान निकाला जाए।





