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आनंद मोहन की रिहाई के लिए नियम बदला तो 5 लाख पिछड़ों-दलितों को आम माफी क्यों नहीं? सुशील मोदी ने नीतीश से पूछा सवाल

PATNA: BJP सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार से सवाल पूछा है. सुशील मोदी ने कहा है कि जब नीतीश सरकार ने कुछ प्रभावशाली लोगों के गंभीर मामलों में सजायाफ्ता

आनंद मोहन की रिहाई के लिए नियम बदला तो 5 लाख पिछड़ों-दलितों को आम माफी क्यों नहीं? सुशील मोदी ने नीतीश से पूछा सवाल
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: BJP सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार से सवाल पूछा है. सुशील मोदी ने कहा है कि जब नीतीश सरकार ने कुछ प्रभावशाली लोगों के गंभीर मामलों में सजायाफ्ता होने के बावजूद उनकी रिहाई के लिए जेल मैन्युअल को शिथिल कर दिया है.  तब शराबबंदी कानून तोड़ने के सामान्य अपराध में मुकदमा झेल रहे लगभग 5 लाख दलितों-पिछड़ों को आम माफी क्यों नहीं दी जा सकती. 


सुशील मोदी ने कहा है कि बिहार सरकार ने शराबंबदी कानून के तहत 3 लाख 61 हजार मुकदमे किये हैं. उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत जिन 5 लाख 17 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया, वे कोई शातिर अपराधी नहीं हैं. शराब के फेरे में गिरफ्तार हुए 90 परसेंट लोग दलित-पिछड़े-आदिवासी समुदाय के हैं. ऐसे लगभग 25 हजार लोग अभी भी जेल में हैं. सुशील मोदी ने कहा है कि शराबबंदी कानून के तहत गिरफ्तार लोगों के लिए आम माफी का एलान कर सरकार को 25 हजार लोगों की तुरंत रिहाई का रास्ता साफ करना चाहिए. इसे मुख्यमंत्री अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनायें. 


सुशील मोदी ने कहा कि शराबबंदी के कारण बिहार की जेलों में जगह नहीं है और अदालतें पहले ही मुकदमों के बोझ से दबी हैं. शराबबंदी के केस में फंसे गरीब मुकदमे के चक्कर में और गरीब हो रहे हैं. ऐसे में अगर सरकार शराबबंदी कानून तोड़ने वालों को आम माफी देती है तो सबको बड़ी राहत मिलेगी.  


सुशील मोदी ने कहा कि बिहार में पिछले 6 सालों में जहरीली शराब पीने से मरने की 30 घटनाओं में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 196 लोगों की मौत हुई, लेकिन इस के लिए दोषी एक भी माफिया या शराब तस्कर को सजा नहीं हुई. राज्य सरकार ने शराब से जुड़े मामले तेजी से निपटाने के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन क्यों नहीं किया ? किसी मामले में स्पीडी ट्रायल क्यों नहीं हुआ? गरीबों को उनके हाल पर क्यों छोड़ दिया गया?

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