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30 दिन जेल में रहने पर CM-PM और मंत्रियों की जाएगी कुर्सी! JPC ने तैयार की ड्राफ्ट रिपोर्ट, मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना

130th Constitution Amendment Bill: 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार, 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद छोड़ना होगा।

130th Constitution Amendment Bill
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

130th Constitution Amendment Bill: केंद्र सरकार 130वें संविधान संशोधन विधेयक को संसद में लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित विधेयक की जांच के बाद संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस विधेयक को मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और मंत्रियों की कुर्सी से जुड़े बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष के विरोध के बाद इस विधेयक को विस्तृत जांच के लिए जेपीसी के पास भेजा गया था।



ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई केंद्रीय अथवा राज्य मंत्री किसी ऐसे गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, और वह लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत (जेल) में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा।



समिति की सिफारिश के मुताबिक, जेल में 30 दिन पूरे होने के बाद 31वें दिन तक प्रधानमंत्री (केंद्रीय मंत्री के मामले में) या मुख्यमंत्री (राज्य मंत्री के मामले में) को राष्ट्रपति या राज्यपाल को संबंधित मंत्री को पद से हटाने की सलाह देनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो 31वें दिन से संबंधित मंत्री स्वतः पदमुक्त माना जाएगा।



इसी तरह यदि स्वयं प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें स्वतः पद से हटाया हुआ माना जाएगा।



हालांकि, समिति ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन का असर सांसद या विधायक की सदस्यता पर नहीं पड़ेगा। संबंधित व्यक्ति केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जैसे कार्यपालिका के पद से हटेगा। वह तब तक सांसद या विधायक बना रहेगा, जब तक उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम या अन्य लागू कानूनों के तहत अयोग्य घोषित नहीं किया जाता।


ड्राफ्ट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि न्यायिक हिरासत से रिहा होने के बाद संबंधित व्यक्ति को संवैधानिक प्रावधानों और नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर दोबारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री नियुक्त किया जा सकता है।



इस विधेयक के तहत संविधान के अनुच्छेद 75 (केंद्रीय मंत्रिपरिषद), अनुच्छेद 164 (राज्य मंत्रिपरिषद) और अनुच्छेद 239AA (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 और केंद्र शासित प्रदेश शासन अधिनियम, 1963 (पुडुचेरी) में भी आवश्यक संशोधन की सिफारिश की गई है।



समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह संशोधन न तो आपराधिक कानून के सिद्धांतों में बदलाव करता है और न ही 'दोष सिद्ध होने तक निर्दोष' माने जाने के सिद्धांत को प्रभावित करता है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 के तहत सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से जुड़े प्रावधानों में भी कोई बदलाव नहीं करता।



जेपीसी का मानना है कि यह प्रस्ताव संघीय ढांचे को भी प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि मंत्रियों को हटाने की प्रक्रिया प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की संवैधानिक सलाह से ही होगी। यदि निर्धारित समय के भीतर ऐसी सलाह नहीं दी जाती है, तभी संबंधित मंत्री का पद स्वतः समाप्त माना जाएगा। संयुक्त संसदीय समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट अगले सप्ताह लोकसभा अध्यक्ष को सौंप सकती है। इसके बाद इस विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता