1st Bihar Published by: 3 Updated Aug 26, 2019, 6:21:20 PM
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PATNA: बिहार के सरकारी स्कूल में तकरीबन एक लाख फर्जी शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं. पटना हाईकोर्ट भी इस खबर को सुनकर हैरान हो उठा. हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से इस बाबत जवाब तलब किया है, कोर्ट ने नाराजगी जताते हुआ कहा कि जब सरकार पिछले कई वर्षों से फर्जी और अमान्य डिग्रीधारी शिक्षको की पड़ताल कर कारवाही कर ही रही है , तब भी सूबे में एक लाख से अधिक फर्जी नियोजित शिक्षक कैसे काम कर रहे हैं ? जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले का खुलासा दरअसल इस मामले में रंजीत पंडित ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय एवम न्यायमूर्ति पार्थसारथी की खण्डपीठ ने आज इस पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के प्रमुख को छह हफ्ते में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया है । सरकार ने फर्जी शिक्षकों को छोड़ा सुनवाई के दौरान एडवोकेट दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया की याचिकाकर्ता ने पूर्व में भी इसी मामले पर जनहित याचिका दायर कर फर्जी डिग्रीधारी शिक्षकों को हटाने की गुहार लगाया था । हाई कोर्ट ने दया के तौर पर फर्जी नियोजित शिक्षकों को एक महीने की मोहलत दी थी और उनसे कहा था कि अगर वे एक महीने के अंदर स्वतः अपने सेवा से त्यागपत्र दे देंगे तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नही की जाएगी । हाई कोर्ट ने एक महीना की मोहलत के बाद राज्य सरकार को पड़ताल शुरू कर फर्जी शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और वेतन वसूलने का आदेश दिया. इस आदेश को पारित हुए 4 वर्ष हो गए लेकिन पड़ताल करने वाली निगरानी ब्यूरो कोई ठोस नतीजा नही दे पा रही है । हाल में सूचना के अधिकार के तहत याचिकाकर्ता ने जब फर्जी डिग्रीधारी शिक्षकों की संख्या मांगी तो ऐसे शिक्षकों की तादाद एक लाख से भी ज़्यादा पायी गयी.