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पगड़ी वाले नेता जी के करीबियों का चुन-चुनकर होगा सफाया, कप्तान साहब ने सेट कर ली फील्डिंग; भाई साहब की पैरवी भी नहीं आएगी काम

PATNA : बिहार की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी या यूं कहें की खुद को सबसे अधिक अनुशासित बताने वाली एक राजनीतिक पार्टी के अंदर चुन-चुनकर कुछ लोगों को किनारा किया जा रहा है। हालांकि,

पगड़ी वाले नेता जी के करीबियों का चुन-चुनकर होगा सफाया, कप्तान साहब ने सेट कर ली फील्डिंग; भाई साहब की पैरवी भी नहीं आएगी काम
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

PATNA : बिहार की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी या यूं कहें की खुद को सबसे अधिक अनुशासित बताने वाली एक राजनीतिक पार्टी के अंदर चुन-चुनकर कुछ लोगों को किनारा किया जा रहा है। हालांकि,इसको लेकर भी तय नियम का हवाला दिया जा रहा है ताकि कोई सीधी उंगली न उठा सकें। लेकिन कहा यह भी जाता है कि राजनीति में कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं किया जाता है और बिना कोई बैकग्राउंड के नहीं किया जाता है। 


लिहाजा अब अंदरखाने इस बात की चर्चा तेज है कि  पार्टी के अंदर दमदार छवि वाले पगड़ी वाले नेता जी को कप्तान साहब ने बड़ी चालाकी से ड्रेसिंग रूम में बैठा रखा है। यह चाह कर भी मैदान में नहीं आ सकते हैं, क्योंकि पार्टी संविधान के अनुसार जो काम किए जा रहे हैं उसपर पहला हक़ कप्तान साहब का ही होता है। ऐसे में पगड़ी वाले नेता जी कोच भाई साहब के पास भी अपनी बात कर रहे हैं। लेकिन, दाल उनकी भी नहीं गल रही है। 


दरअसल, बिहार की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के अंदर जल्द ही संगठन चुनाव होना है। इससे पहले पार्टी के अंदर बनने वाली नई प्रदेश कमिटी में वर्तमान   कप्तान साहब पूर्व के कप्तान कह लें या कहें कि पगड़ी वाले नेता जी के करीबियों को चुनचुनकर बाहर करने का प्लान तैयार कर लिए हैं। इसमें प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, मंत्री और प्रवक्ता को साइड करने की तैयारी चल रही है। ऐसे में जब इनलोगों को भनक लगी कि इन्हें साइड किया जा रहा है तो यह लोग अपनी बात लेकर पगड़ी वाले नेता जी के पास पहुंचे।

कप्तान ही तय करेंगे प्लेयिंग 11

 ऐसे में यह नेता जी पहले तो खुद प्रयास किया और बातचीत भी की लेकिन बात बन सकी। उल्टा इन्हें यह कहा गया कि आप अब जिस दायित्व में हैं उसका आस्थापूर्ण तरीके से निर्वाहन करें। ऐसे में यह नेता जी    अपनी बात लेकर भाई साहब के पहुंचे। इसके बाद भाई साहब ने भरोसा दिलाया कि मदद की जाएगी। लेकिन उनके भरोसे के बाद भी उम्मीद कम दिख रही है कि उनकी बात मानी जाएगी। क्योंकि इस मामले में निर्णय करने का अधिकार कप्तान साहब के पास है। ऐसे में कोच की भूमिका तो होती है। लेकिन प्लेयिंग 11 तो कप्तान साहब ही तय करेंगे।

पिछले मैच में नहीं रहा बेहतर परफॉर्मेंस

वहीं, इस नवाचार को लेकर कप्तान साहब का मानना है कि हमारा लक्ष्य 2025 का चुनाव है किस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। पुराने लोग भी लोकसभा चुनाव में काम कर चुके हैं लेकिन वह बेहतरीन ढंग से परफॉर्मेंस नहीं कर पाए। ऐसे में नई टीम बनाई जाएगी तो नहीं ऊर्जा के साथ बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि कप्तान साहब सीधा किसी को साइड करेंगे बल्कि वह इस दिशा में पार्टी के संविधान के अनुसार एक व्यक्ति एक पद परंपरा को केंद्र में रखकर काम करेंगे। 

इस लोगों को इशारों -इशारों में मिल गया संदेश

पहल की आड़ में जिला स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति (बीस सूत्री)से लेकर बोर्ड आयोग पर निगम में जिला से लेकर प्रदेश प्राधिकारी को बाहर रखने की पटकथा लिखी जा रही। ऐसे नेताओं में वर्तमान प्रदेश महामंत्री जगरनाथ ठाकुर, राजेश वर्मा, ओर ललन मंडल का नाम सम्मिलित है। इसके अलावा दो प्रदेश महामंत्री मिथिलेश तिवारी एवं शिवेश राम को पार्टी ने बक्सर एवं सासाराम से लोकसभा चुनाव लड़वाया था। वही प्रदेश उपाध्यक्ष शीला प्रजापति बाल संरक्षण आयोग में दायित्व संभाल रहे हैं। एक प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर भीम सिंह राज सभा सदस्य मनोनीत हो चुके हैं जबकि एक प्रदेश प्रवक्ता अनामिका सिंह पटेल विधान परिषद में जा चुकी है।

एक पद -एक शख्स का संविधान 

वहीं दूसरे प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंह को बाल संरक्षण आयोग में सदस्य पद पर बनाया गया है। इसके अच्छे तो सुग्रीव दास और अन्य कई कार्यकर्ताओं को दायित्व दिया गया ऐसे में पार्टी एक व्यक्ति एक पद के संविधान के तहत किनारे करने कार्यकर्ताओं को आगे करने की रणनीति पर काम कर रही है। लिहाजा पगड़ी वाले नेताजी के जो सिपहसालार थे वह धीरे-धीरे कर पार्टी संविधान के अनुसार साइड लाइन हो जाएंगे।