मानवाधिकार दिवस पर सेमिनार, प्रखंडों के विकास के लिए लॉन्च हुआ मास्टर प्लान

मानवाधिकार दिवस पर सेमिनार, प्रखंडों के विकास के लिए लॉन्च हुआ मास्टर प्लान

PATNA : विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के द्वारा "अंत्योदय-ग्रामोदय-सर्वोदय" विषय पर आयोजित सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार को सम्बोधित करते हुए प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति का नैसर्गिक या प्राकृतिक अधिकार है. इसके अंतर्गत जीवन, आज़ादी, समानता और सम्मान का अधिकार आता है. इसके अतिरिक्त गरिमामय जीवन जीने का अधिकार, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार भी मानवाधिकार के अंतर्गत आते हैं. 


उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने लोगों को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने और उनके अधिकारों के संरक्षण की प्रतिबद्धता के साथ वर्ष 2001 में मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान की स्थापना की थी. संस्था के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए नीतीश मिश्रा ने कहा कि आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में प्रखण्ड स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. 


इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक प्रखण्ड की प्रमुख विशेषताओं को चिन्हित करते हुए उसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर विकास को बढ़ावा देना है. साथ ही प्रत्येक प्रखण्ड की प्रमुख समस्याओं व आवश्यकताओं की मैपिंग करते हुए उन समस्याओं के समाधान हेतु व्यापक कार्ययोजना का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है. उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा प्रखण्ड स्तर पर आवश्यकताओं एवं विशेषताओं को संकलित करते हुए एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा जिससे भविष्य में प्रखण्ड स्तर पर विकास सम्बन्धी कार्ययोजना तैयार करने में सहायता प्राप्त होगी.


साथ ही इस विजन डॉक्यूमेंट को उचित मंच के माध्यम से सरकार तक भी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा जिससे 'अंत्योदय-ग्रामोदय-सर्वोदय' का संकल्प साकार हो सके एवं समग्र विकास का उद्देश्य पूर्ण हो सके. इस अवसर पर नीतीश मिश्रा ने कहा कि संस्थान आने वाले दिनों में ग्राम स्तर पर सदस्यता अभियान चलाकर लोगों को संस्था से जोड़ने का प्रयास करेगी. इस संस्था के सदस्य राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने के साथ ही आमजन के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध हैं. इस परिसंवाद को श्याम बिहारी मिश्र, शेखर राम (अधिवक्ता), अरूण ठाकुर, पंकज चौधरी एवं जयशंकर शर्मा आदि ने भी सम्बोधित कर अपने-अपने विचार व्यक्त किये.