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लोकसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर सवर्ण और OBC समाज पर BJP दिखा रही भरोसा, जानिए क्या है इसके राजनीतिक मायने

PATNA : अगले साल अप्रैल के महीने में लोकसभा चुनाव करवाया जा सकता है। इस चुनाव को लेकर देश और राज्य की तमाम राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुईं हैं। वहीं, बिहार

लोकसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर सवर्ण और OBC समाज पर BJP दिखा रही भरोसा, जानिए क्या है इसके राजनीतिक मायने
Tejpratap
Tejpratap
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PATNA : अगले साल अप्रैल के महीने में लोकसभा चुनाव करवाया जा सकता है। इस चुनाव को लेकर देश और राज्य की तमाम राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुईं हैं। वहीं, बिहार में 40 सीटों पर लोकसभा का चुनाव होना है और इसको लेकर बिहार से जुड़ी तमाम राजनीतिक पार्टियां जमीनी स्तर से खुद को मजबूत करने में जुटी हुई है। यही वजह है कि राजनीतिक पार्टी अपने प्रदेश पधाधिकारी की नई लिस्ट जारी कर रही है।


 सबसे बड़ी बात है कि इन लिस्ट के जरिए यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि इस बार के चुनाव में उनका एजेंडा क्या होने वाला है ? इसके साथ ही इस बार के चुनाव ने  किस बिरादरी को अधिक तरहजी मिलने वाली है। इसी कड़ी में भाजपा ने भी अपने प्रदेश पधाधिकारी की लिस्ट जारी की है। जिसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि बीजेपी एक बार वापस से अपने कैडर वोट बैंक से साथ ही जा रही है, भाजपा कुछ नया तो नहीं कर रही है। लेकिन, इससे कहीं ऐसा न हो कि इन्हें दूसरे समाज की नाराजगी उठानी पड़े और ऐन वक्त पर कोई बड़ा फैसला लेना पड़ जाए। 


दरअसल, बिहार भाजपा प्रदेश अद्यक्ष सम्राट चौधरी के नेतृत्व में पार्टी के नए प्रदेश पधाधिकारी की लिस्ट जारी की की गई। इस लिस्ट में 38 पदाधिकारियों का नाम शामिल किया गया है। लेकिन, इस लिस्ट के जारी होने के बाद जो सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वह ये है कि, बिहार भाजपा ने आगामी चुनाव को लेकर किस समुदाय पर अधिक भोरसा जताया है ? जिसके बाद जब इस सवाल का जवाब तलाशा गया तो जो समीकरण तय किया गया था उसके मुताबिक भाजपा एक बार फिर से अपने पुराने को कैडर वोट बैंक कहे जाने वाले समाज पर ही भरोसा करती हुई नजर आ रही है। भाजपा के तरफ से एक बार फिर से सवर्ण समुदाय पर भरोसा किया है। इसके बाद कुशवाहा समाज पर अधिक ध्यान दिया गया है। 


सम्राट चौधरी के तरफ से जो लिस्ट तैयार की गयी है उसमें  38 पदाधिकारियों में 17 सवर्ण जाति के हैं। यादव जाति के सिर्फ 1 पदाधिकारी बने। सबसे बड़ी बात है कि  सम्राट की टीम में एक भी अल्पसंख्यक नहीं है। टीम में 12 उपाध्यक्ष, 5 महामंत्री, 12 प्रदेश मंत्री, 1 मुख्यालय प्रभारी, 2 सह प्रभारी, 1 कोषाध्यक्ष, 2 सह कोषाध्यक्ष, 1 कार्यालय मंत्री और 2 सह कार्यालय मंत्री हैं। इस लिस्ट में कुशवाहा समाज से तीन लोगों को जगह दी गई है। यह तीनों लोग सम्राट के काफी भरोसेमंद माने जाते हैं। ब्राह्मण -6, भूमिहार-5, राजपूत- 5, कायस्थ - 1, कुर्मी - 1, कुम्हार - 1, नाई- 1, नोनिया -1, तेली- 1, कुशवाहा - 3, मल्लाह -1धानुक - 1, रविदास - 2, दांगी - 1, पासवान - 1, वैश्य - 4 ,यादव - 1 लोगों को इस लिस्ट में जगह दी गयी है। 


वही इस लिस्ट के जारी होने के बाद दूसरा सबसे बड़ा सवालिया बन कर सामने आ रहा है कि इस लिस्ट के जरिए नित्यानंद राय को जोरदार झटका दिया गया है। जिस तरह से इस लिस्ट में महज यादव समुदाय के लोगों को शामिल किया गया है उसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या सही मायने में अब नित्यानंद राय खुद बिहार बीजेपी संगठन में दखलंदाजी नहीं देना चाहते हैं या फिर उनकी अब नहीं चल रही ? हालांकि बीजेपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी का यह मानना है कि इस समुदाय के जो वोट प्रतिशत भाजपा को मिल रही है उससे फिलहाल कोई बदलाव होता नजर नहीं आ रहा है।  लेकिन, पिछले कुछ दिनों से जो राजनीतिक हालत बने उससे भाजपा के कैडर वोटर उससे नाराज होने लगे थे ऐसे में अब इनको वापस से अपने साथ बनाए रखने के लिए यह लिस्ट जारी की गई है। 


इधर, बिहार बीजेपी को लेकर पिछले कुछ दिनों से केंद्र की भाजपा टीम भी विशेष रुप से ओबीसी समुदाय पर अधिक ध्यान दी हुई है। यही वजह है कि पार्टी उपेंद्र कुशवाहा को अपने साथ बिहार में लाई है और उत्तर प्रदेश में भी ओबीसी समाज के बड़े नेता को अपनी पार्टी में शामिल कराई है। ऐसा कहां जा रहा है कि बीजेपी इस बार लोकसभा चुनाव सवर्ण और ओबीसी समुदाय को ही अपने साथ रखकर जीतने की तैयारी कर रही है।