1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Nov 28, 2024, 8:15:44 AM
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PATNA: पटना सदर अनुमंडल की पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि मैत्री सिंह ने अपने स्थानांतरण के बाद भी लगभग 200 फाइलों का बैकडेट में निपटारा किया था। इतना ही नहीं, डीसीएलआर कार्यालय में बिचौलियों के माध्यम से फाइलों का निपटारा किया जाता था।
बैक डेट में 200 फाइलें निपटाईं
जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, भूमि विवाद निराकरण वाद से संबंधित 50 अभिलेख स्थानांतरण के बाद वापस किए गए, लेकिन अभी भी 10 अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इनमें से कई अभिलेखों में आदेश पूर्व से पारित है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में फाइलों का निष्पादन वर्तमान में दिखाया जा रहा है।
बिचौलियों के जरिए होता था पूरा खेल
मामला सुर्खियों में आने के बाद, निखिल कुमार नामक व्यक्ति ने डीसीएलआर कार्यालय के लिपिक को फाइल लौटाई थी। जांच में पता चला कि निखिल कुमार, शनि प्रियंकर, सुमित और अभिषेक कुमार सभी पूर्व डीसीएलआर के दोस्त हैं और उन्होंने मिलकर गोरखधंधा किया। डीसीएलआर की ओर से आदेश पारित करने के बाद फाइलों को कार्यालय से बाहर रखा जाता था। यह स्पष्ट संकेत है कि कुछ गड़बड़ हो रही थी।
कमेटी ने की सिफारिश
मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह को इस मामले में दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की है। बता दें कि पटना सदर की पूर्व डीसीएलआर मैत्री सिंह ट्रांसफर होने के बाद भूमि विवाद से जुड़ी 750 फाइलें और सरकारी कंप्यूटल लेकर फरार हो गई थीं। जिसके बाद पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने एक जांच कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी।