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बिहार में गजब कारनामा! भू-माफिया ने सरकारी स्कूल की जमीन का कर डाला सौदा, दाखिल-खारिज भी करवाया

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Dec 05, 2024, 7:16:27 AM

बिहार में गजब कारनामा! भू-माफिया ने सरकारी स्कूल की जमीन का कर डाला सौदा, दाखिल-खारिज भी करवाया

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PATNA : बिहार में आए दिन कोई न कोई ऐसा मामला निकल कर सामने आता ही रहता है जिसे जानकर हर कोई हैरान हो जाए। अब एक ऐसा ही मामला पूर्वी चंपारण जिले से निकल कर सामने आया है। यहां भू-माफिया ने सरकारी स्कूल की जमीन बेच डाली। इतना ही नहीं उसने इसका दाखिल-खारिज भी करवा लिया और उस समय तक किसी को भी इस बात की भनक नहीं लगी की यह जमीन कौन सी है ? 


दरअसल, मोतिहारी से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कथित भू-माफिया ने एक नहीं बल्कि दो-दो सरकारी स्कूलों की जमीन बेच दी। सरकारी जमीन की विक्रेता के नाम पर रजिस्ट्री भी करा दी गई। यहां तक कि दाखिल-खारिज भी खरीदने वाले के नाम पर कर दिया गया। जबकि इस जमीन पर अभी स्कूल बना हुआ है और बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। यह मामला पूर्वी चंपारण जिले के ढाका प्रखंड का है।


बताया जा रहा है कि उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपकड़ी और उत्क्रमित मध्य विद्यालय फुलवारिया की भूमि को बेचा गया है। फुलवारिया स्कूल की 41 डिसमिल जमीन की पांच साल पहले 2019 में रजिस्ट्री की गई। ढाका के अंचलाधिकारी ने फुलवरिया स्कूल की दाखिल खारिज खरीदने वाले के नाम पर कायम भी कर दी है। यूं तो इस मध्य विद्यालय में शिक्षक भी पदस्थापित हैं और सैकड़ों बच्चे पढ़ने आते हैं लेकिन कर्मचारी की रिपोर्ट के मुताबिक भूमि रिक्त घोषित की गई है, जिसपर विक्रेता का दखल-कब्जा बताया गया है।


वहीं, सूत्रों ने बताया कि उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पचपकड़ी की भूमि को भी बेचा गया है। जबकि यह जमीन विद्यालय परिसर के अंदर है और बच्चे उसे खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इस जालसाजी को गोपनीय रखने के लिए ढाका में निबंधन कार्यालय होने के बावजूद उसकी रजिस्ट्री मोतिहारी निबंधन कार्यालय में कराई गई।


इधर, दोनों ही मामलों को ढाका के विधायक पवन जायसवाल ने इस बार विधानसभा में सवाल भी उठाया। विभागीय मंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है। मामले की जांच अपर समाहर्ता मुकेश सिंह कर रहे हैं। उन्होंने संवाद एजेंसी से बातचीत में स्वीकार किया कि यह गम्भीर किस्म का अपराध है। इसमें सम्मिलित किसी भी कर्मचारी अथवा अधिकारी के साथ कोई रियायत नहीं की जा सकती।