1st Bihar Published by: Updated Oct 08, 2021, 12:43:55 PM
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PATNA : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने गुरुवार को 65वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया. इस परीक्षा में 422 उम्मीदवारों ने बाजी मारी है. गरीब परिवार से आने वाले दर्जनों अभ्यर्थियों को सफलता मिली है. मुजफ्फरपुर जिले के धनौर गांव के रहने वाले एक किसान के बेटे ने डीएसपी बनकर अपने पिता का सपना पूरा किया है. डीएसपी के रूप में बेटे का चयन होने के बाद पूरे गांव-मोहल्ले में ख़ुशी की लहर है.
बीपीएससी 65वीं में गौरव सिंह ने टॉप किया है. मेरिट लिस्ट में दूसरे स्थान पर चंदा भारती और तीसरे स्थान पर सुमित कुमार हैं. लेकिन 45वीं रैंक हासिल कर डीएसपी बनने वाले राजीव कुमार सिंह की काफी चर्चा है. दरअसल राजीव जब दसवीं क्लास में थे तब साल 1999 में मात्र एक नंबर से ये मैट्रिक में फेल हो गए थे. लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दूसरी बार मे मैट्रिक फर्स्ट डिवीजन से पास किया.
राजीव कुमार सिंह मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के धनौर गांव के रहने वाले हैं. इनके पिता राम लक्ष्मण सिंह पेशे से किसान हैं और धनौर गांव में ही रहकर किसानी करते हैं. साल 2000 में मैट्रिक एग्जाम पास करने के बाद राजीव ने 2002 में इंटर में सफलता हासिल की और इंटर पास करते ही CISF में इनकी नौकरी क्लर्क के रूप में हो गई.
सात साल बाद सीआईएसफ में क्लर्क की नौकरी छोड़कर इन्होंने वर्ष 2009 में सेंट्रल एक्साइज में टैक्स असिस्टेंट के रूप में नौकरी ज्वाइन कर ली. कस्टम में इंस्पेक्टर के रूप में इनकी नौकरी हुई और फिलहाल ये इसी विभाग में कस्टम सुपरिटेंडेंट पद पर नियुक्त हैं.

बेटे की इस बड़ी सफलता से खुश राजीव के पिता राम लक्ष्मण सिंह ने बताया कि बेटे की कामयाबी के पीछे कठिन संघर्ष है. परिवार काफी आर्थिक तंगी में रहते हुए भी बच्चों के पढ़ाई में कभी किसी तरह की कमी नहीं आने दी. मैट्रिक में फेल होने के बावजूद भी राजीव ने हिम्मत नहीं हारी और उसने अगले ही अटेम्प्ट में अच्छे मार्क्स से पास किया.