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आखिर कैसे AK -47 मामले में जेल से रिहा हुए अनंत सिंह , पुलिस को काफी महंगी पड़ी यह छोटी गलतियां!

PATNA : मोकामा के पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह कल बेऊर जेल से रिहा हो गए। अनंत सिंह को Ak 47 मामले में साक्ष्य के अभाव में रिहा किया गया है। लेकिन, इनकी रिहाई के बाद जिन बातों की

आखिर कैसे AK -47 मामले में जेल से रिहा हुए अनंत सिंह , पुलिस को काफी महंगी पड़ी यह छोटी गलतियां!
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

PATNA : मोकामा के पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह कल बेऊर जेल से रिहा हो गए। अनंत सिंह को Ak 47 मामले में साक्ष्य के अभाव में रिहा किया गया है। लेकिन, इनकी रिहाई के बाद जिन बातों की चर्चा सबसे अधिक हो रही है वह बैलिस्टिक रिपोर्ट। जिसे महज आधे घंटे में बनवा लिया गया। दरअसल, मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट ने एक साथ दो केस में बाइज्जत बरी कर दिया, जिसके बाद उनकी रिहाई हुई। इसमें एक केस तो बाढ़ के लदमा में अनंत सिंह के पैतृक आवास से एके 47, 26 कारतूस और दो ग्रेनेड की बरामदी का था।


वहीं, दूसरा केस था पटना में  अनंत सिंह के विधायक आवास से इंसास राइफल की छह गोलियों और बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद होने का। अब इस केस में असली रिहाई की कहानी यहीं से शुरू होती हैं। क्योंकि पुलिस ने एके 47 केस की जांच में भरपूर लापरवाही बरती तो इंसास राइफल गोली और बुलेटप्रूफ जैकेट केस में तो अनुसंधान के नाम पर सत्यानाश कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस केस में भी निचली अदालत का फैसला पलट दिया और अनंत सिंह को रिहा कर दिया।सबसे पहले मोकामा के पूर्व विधायक के पटना आवास पर 24 जून 2015 को छापा मारा गया था। पुलिस ने कहा कि यह रेड बाढ़ थाना में दर्ज एक केस में कोर्ट से जारी तलाशी वारंट के आधार पर मारा गया था। लेकिन, कोर्ट के अंदर इस वारंट की मांग की गई तो पुलिस वारंट पेश ही नहीं कर सकी।


इसके बाद सबसे मजेदार बात ये हुई कि पुलिस ने बाढ़ के जिस वारंट की तामील के लिए रेड मारा, उसमें कोई बाढ़ का पुलिस अफसर ही नहीं था जबकि कायदे से दूसरे थाना क्षेत्र में रेड के लिए संबंधित थाना का कोई अधिकारी वारंट के साथ जाता है और लोकल थाना सहयोगी की भूमिका में होते हैं। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ था ही नहीं। कोर्ट में पुलिस की असल किरकिरी तो तब हुई जब पता चला कि पुलिस ने केस में अनंत सिंह को रेड के दौरान विधायक के तौर पर उन्हें मिले सरकारी आवास में मौजूद बताया और यह भी दावा किया कि अनंत सिंह ने सीजर लिस्ट पर दस्तखत करने से मना कर दिया। जबकि सच्चाई यह थी कि अनंत सिंह बिहटा थाना के एक केस में जेल में बंद थे और इस केस में उनका रिमांड हुआ था। जिसके बाद कोर्ट ने माना कि यह छापा और तलाशी अनंत सिंह की गैरमौजूदगी में हुई। 


उधर, पुलिस एके 47 केस की तरह इस केस में भी ये साबित नहीं कर पाई कि अनंत सिंह को विधायक आवास में छुपाकर रखे गए इंसास राइफल के कारतूस या बुलेटप्रूफ जैकेट के बारे में उनके पास कोई जानकारी थी। हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ अनुसंधान गड़बड़ नहीं है बल्कि अभियोजन पक्ष एक भी बुनियादी सवाल का जवाब नहीं दे पाया। सीजर लिस्ट और बरामद सामान को सील करने के जगह और समय को लेकर पुलिस अफसरों के बयान एक-दूसरे के विरोधाभासी निकले। रेड में शामिल रहा अफसर भी अपने बयान से पलट गया। कोर्ट ने इस बात का भी नोटिस लिया कि इंसास राइफल की बरामद गोलियों की बैलिस्टिक रिपोर्ट मात्र 35 मिनट में तैयार हो गई। कोर्ट ने पूछा भी कि किस वैज्ञानिक तरीके से कारतूस की जांच की गई कि 35 मिनट में जांच भी हो गई और उसकी रिपोर्ट भी तैयार हो गई।