ब्रेकिंग
मंदिर में बिजली का तार जोड़ते समय करंट की चपेट में आए पुलिस-रेल कर्मचारी, दोनों की मौके पर मौतभारत-नेपाल बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई: भारी मात्रा में गांजा जब्त, दिल्ली के 3 तस्कर गिरफ्तार; नकदी और मोबाइल भी बरामदमंजू हत्याकांड में बड़ा खुलासा, छह वर्षीय बेटे आर्यन का शव बरामद; मुख्य आरोपी गिरफ्तारमुजफ्फरपुर में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, 7 महीने में अपहरण के 343 केस; हर 15 घंटे में एक FIRबिहार से यूपी का सफर होगा आसान! जल्द शुरू होगा नया फोरलेन हाईवे, इन गांवों की जमीन होगी अधिग्रहितमंदिर में बिजली का तार जोड़ते समय करंट की चपेट में आए पुलिस-रेल कर्मचारी, दोनों की मौके पर मौतभारत-नेपाल बॉर्डर पर बड़ी कार्रवाई: भारी मात्रा में गांजा जब्त, दिल्ली के 3 तस्कर गिरफ्तार; नकदी और मोबाइल भी बरामदमंजू हत्याकांड में बड़ा खुलासा, छह वर्षीय बेटे आर्यन का शव बरामद; मुख्य आरोपी गिरफ्तारमुजफ्फरपुर में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, 7 महीने में अपहरण के 343 केस; हर 15 घंटे में एक FIRबिहार से यूपी का सफर होगा आसान! जल्द शुरू होगा नया फोरलेन हाईवे, इन गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

Consumer Rights : 10 रुपये बचाने चली कंपनी, 8 हजार गंवा बैठी! कैरी बैग को लेकर ग्राहक ने ऐसा सबक सिखाया कि कोर्ट ने भी माना हक

हरियाणा के रोहतक में 10 रुपये के कैरी बैग को लेकर शुरू हुई लड़ाई 3 साल बाद उपभोक्ता आयोग तक पहुंची। ग्राहक के पक्ष में फैसला देते हुए आयोग ने 8 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

Consumer Rights : 10 रुपये बचाने चली कंपनी, 8 हजार गंवा बैठी! कैरी बैग को लेकर ग्राहक ने ऐसा सबक सिखाया कि कोर्ट ने भी माना हक
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Consumer Rights : कहते हैं कि बूंद-बूंद से सागर भरता है, लेकिन 10 रुपये के एक छोटे से कैरी बैग ने ऐसा तूफान खड़ा किया कि मामला सीधे उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। जिस बैग को शायद दुकान वाले "सिर्फ 10 रुपये" समझ रहे थे, वही आखिरकार हजारों रुपये का नुकसान करवा गया। मामला 1 अप्रैल 2023 का है। एक युवक बड़े आराम से जूते खरीदने शोरूम पहुंचा। जूते पसंद किए, ट्रायल किया, बिलिंग काउंटर पर पहुंचा और भुगतान कर दिया। सब कुछ सामान्य था। लेकिन जैसे ही बिल हाथ में आया, उसमें एक अतिरिक्त एंट्री दिखाई दी—कैरी बैग, कीमत 10 रुपये।


अब ग्राहक ने सोचा कि हजारों रुपये के जूते खरीदने के बाद सामान घर ले जाने के लिए एक बैग तो कम से कम मुफ्त मिलना चाहिए। उसने बैग के पैसे हटाने की मांग की, लेकिन स्टोर कर्मचारियों ने कंपनी की नीति का हवाला देते हुए साफ मना कर दिया। शायद उन्हें लगा होगा कि ग्राहक दो मिनट बहस करेगा और फिर घर चला जाएगा। लेकिन यहां कहानी में ट्विस्ट आ गया। ग्राहक ने इसे सिर्फ 10 रुपये का मामला नहीं माना, बल्कि अपने अधिकारों का सवाल समझा। उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटा दिया। कई लोग जहां हजारों-लाखों की ठगी के बाद भी शिकायत दर्ज नहीं कराते, वहीं इस युवक ने 10 रुपये के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया।


उधर कंपनी ने भी पूरा दम लगाया। दलील दी गई कि कैरी बैग का शुल्क पर्यावरण संरक्षण के लिए लिया जाता है। ग्राहकों को जागरूक बनाने, पेड़ों को बचाने और प्लास्टिक या पेपर बैग के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था। तर्क यह भी दिया गया कि किसी ग्राहक को बैग खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, वह चाहे तो अपना बैग लेकर आ सकता है। सुनने में दलील काफी आदर्शवादी लगती है। लेकिन सवाल यह उठा कि जब कोई ग्राहक दुकान से सामान खरीद चुका है, तो उसे सामान ले जाने की व्यवस्था करना आखिर किसकी जिम्मेदारी है? ग्राहक की या दुकानदार की?


ग्राहक पक्ष के वकील ने यही मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी वस्तु को "डिलीवरी योग्य स्थिति" में ग्राहक को सौंपना विक्रेता का बुनियादी दायित्व है। अगर कोई व्यक्ति जूते खरीद रहा है तो उसे हाथ में पकड़कर सड़क पर चलने के लिए तो नहीं कहा जा सकता। ऐसे में बैग की कीमत ग्राहक से वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाना चाहिए। तीन साल तक चली सुनवाई के बाद आखिरकार उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुना दिया। आयोग ने माना कि ग्राहक से बैग के लिए अलग से शुल्क लेना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।


फैसले के तहत ग्राहक को 10 रुपये वापस करने के अलावा 4 हजार रुपये मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के मुआवजे के तौर पर तथा 4 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया। यानी कुल 8 हजार रुपये का भुगतान। इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई रकम से नहीं, सिद्धांतों से तय होती है। कई बार कंपनियां यह मान लेती हैं कि छोटी रकम पर कोई ग्राहक अदालत नहीं जाएगा। लेकिन यह मामला बताता है कि जागरूक उपभोक्ता चाहें तो 10 रुपये को भी न्याय का मुद्दा बना सकते हैं।


अब बाजार में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए यह फैसला एक संदेश है कि ग्राहक को छोटा समझने की भूल कभी-कभी काफी महंगी पड़ सकती है। आखिरकार, जिस 10 रुपये के कैरी बैग से विवाद शुरू हुआ था, उसने हजारों रुपये का सबक सिखा दिया और यह सबक मिला मशहूर फुटवियर ब्रांड रेड टेप (Red Tape) को।