Bihar News: बिहार में शराबबंदी है. इस कानून के लागू हुए एक दशक बीत गए। इतने समय में शराबबंदी से कितना फायदा और कितना नुकसान हुआ, इस पर काफी समीक्षा हो चुकी है. शुरूआती दौर में फायदे दिखे, पर समय के साथ इससे फायदा कम नुकसान ज्यादा दिखाई पड़ने लगा. हकीकत यही है कि,आज की तारीख में कागज पर ही शराबबंदी है, हर जगह शराब की सप्लाई हो रही. सवाल है कि सरकार किसे फायदा पहुंचा रही ?
किसको फायदा पहुंचा रही सरकार ?
शराबबंदी से किसे फायदा है? क्या आम जनता को शराबबंदी से लाभ है? जवाब होगा नहीं. तब लाभ किसे है, अधिकांश लोगों का जवाब- अफसर और माफिया मालामाल हो रहे. इसी की एक बानगी, इस खबर के माध्यम से बता रहे हैं. यह खबर पड़ोसी राज्य की सीमा से सटे बिहार के एक जिले की है. यह जिला शराब के मामले में काफी बदनाम रहा. इतना ही बदनाम इस जिले के एक्साइज अफसर रहे हैं. पिछले महीनों में कई एक्साइज अफसरों पर कार्रवाई भी हुई. इसके बाद भी फर्क नहीं पड़ा. आज भी पड़ोसी राज्य से खुल्लम खुल्ला शराब की इंट्री कराई जा रही . इस खेल में एक्साइज के अफसर शामिल हैं.
शराब माफिया और एक्साइज अफसरों के बीच एमओयू !
आंतरिक सूत्रों से जो जानकारी मिली है, वो चौंकाने वाली है. एक्साइज अफसरों ने पिछले महीने शराब माफियाओं से सेटिंग की है. अफसर और माफिया के बीच एक समझौता पत्र तैयार हुआ. इसके बाद उसे लागू कर दिया गया है. एक्साइज अफसरों ने शराब माफियाओं को पड़ोसी राज्य से शराब की इंट्री की खुली छूट दे दी है. शराब कैसे आयेगा, किन गाड़ियों से लाया जायेगा, इसका पूरा खाका तैयार किया गया. शराब माफियाओं ने पड़ोसी राज्य से शराब मंगवाने के लिए 18 स्कॉपियो की एक लिस्ट एक्साइज अफसरों की दी है. उस लिस्ट को एक्साइज अफसरों ने एप्रुव किया.इसके बाद काम शुरू हो गया.
शराब में लगी गाड़ी से हर महीने 4 लाख की वसूली
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एक्साइज अफसरों और माफियाओं के बीच जो समझौता हुआ है, उसके अनुसार, प्रति गाड़ी 4 लाख रू प्रति माह देना है. 18 गाड़ी से पड़ोसी राज्य से शराब की इंट्री उक्त जिले में करानी है. इस तरह से 72 लाख रू प्रति माह पर बात बनी है. इन 72 लाख में एक्साइज के जिला कप्तान और एक्साइज थानाध्यक्ष का हिस्सा बताया गया है.
शराब में लगी गाड़ियों को रोकना मना है.....
जानकारी के अनुसार, शराब माफियाओं ने शर्त रखी है कि हमारी गाड़ियों को छूना नहीं है. 18 स्कॉपियो का जो नंबर साझा किया गया है, उसे रोकना नहीं है. ये गाड़ियां रात में पड़ोसी राज्य से शराब लेकर उक्त जिले के विभिन्न प्वाइंट पर पहुंचती है और डिलीवरी कर आराम से निकल जाती हैं.
समझौैते वाली गाड़ी को पकड़ना एक्साइज एएसआई को पड़ा महंगा
जानकारी के मुताबिक, समझौते वाली एक स्कॉपियो को एक्साइज के एक एएसआई ने पकड़ लिया, तब एक्साइज थानाध्यक्ष ने धमकी दी और जबरन शराब लदी उक्त गाड़ी को छुड़वा दिया. पूरे खेल में एक्साइज के जिला कप्तान की पूरी मिलीभगत बताई जा रही है.
कार्रवाई के बाद भी नहीं मान रहे एक्साइज अफसर
अब आप कहेंगे, कि वो कौन जिला है जहां शराब माफिया और एक्साइज अफसरों के बीच समझौता हुआ है. हम आपको बताते हैं कि उक्त जिला पड़ोसी राज्य से सटा हुआ है. इस जिले की चौहद्दी में दो तरफ से पड़ोसी राज्य की सीमा सटी है. शराब के मामले में काफी बदनाम जिला है. कुछ महीने पहले ही शराब माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं करने पर एक्साइज के जिला कप्तान को हटाया गया था. उत्पाद थानेदार को भी चलता कर दिया गया था. जो नए आए हैं, वे माफियाओं की गोद में बैठ गए. इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार के मामले में सरकार की एक जांच एजेंसी ने भी एक्साइज के एक अफसर के ठिकानों पर छापेमारी की थी. इसके बाद भी इन अफसरों में कोई डर नहीं है.
सचिवालय तक पहुंचा कारनामा....
उक्त जिले में बैठे एक्साइज के कप्तान और थानेदार की शराब माफियाओं के साथ एमओयू की खबर सचिवालय तक भी पहुंची है. कुछ दिन पहले मीटिंग में भी वरीय अधिकारियों ने एक्साइज के कप्तान की क्लास ली थी और कार्य प्रणाली में सुधार लाने को कहा था. इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा.





