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अराजकता ! एक्साइज के 'सहायक आयुक्त' का कमाऊ पूत सब पर भारी....शराबबंदी वाले राज्य में यह क्या हो रहा ? शराब से अकूत संपत्ति अर्जित कर रहे अफसर- माफिया

बिहार में शराबबंदी कानून के बीच उत्पाद विभाग के एक सहायक आयुक्त और उनके खास सिपाही की खूब चर्चा हो रही है. सीमावर्ती जिले में तैनात इस जोड़ी को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है.

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AI से सांकेतिक तस्वीर
© Google
Viveka Nand
5 मिनट

Bihar News: नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया. यह कानून लागू हुए एक दशक बीत गए. इतने सालों में एक बात स्पष्ट तौर पर दिखती है, शराब बंद हो या नहीं, माफिया और अफसर मालामाल जरूर हो गए. जो राजस्व पहले सरकारी खजाने में जाता था, वो सीधे इनके पैकेट में जा रहा. उत्पाद विभाग के अधिकारियों-कर्मियों में तो कानून तोड़ने को लेकर गजब की प्रतिस्पर्धा है. अपवाद को छोड़ दें तो नीचे से लेकर ऊपर तक सरकारी सेवक शराबबंदी कानून को विफल कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे. मद्य निषेध विभाग कुछ खास नहीं कर पा रहा. हद तो तब जब शराब के खेल में शामिल चार्जशीटेड अफसर को जिले की कमान सौंप दी जा रही.  

सहायक आयुक्त के कमाऊ पूत की खूब हो रही चर्चा 

यहां बात हो रही है कि बिहार के एक महत्वपूर्ण जिले की. जहां सहायक आयुक्त का एक कमाऊ पूत सब पर भारी है. उसके आगे दारोगा-इंस्पेक्टर कुछ नहीं. शख्स का कानून से कोई मतलब नहीं, मतलब सिर्फ पैसे से है. विभाग के ही सूत्र बताते हैं कि उक्त सिपाही पर सहायक आयुक्त का सीधा हाथ है. लिहाजा दारोगा-इंस्पेक्टर को रत्ती भर भी वैल्यू नहीं देता. सहायक आयुक्त के खास सिपाही को मतलब सिर्फ वसूली से है. रात भर जमकर वसूली...सुबह में साहब की हिस्सेदारी. इसी फार्मूले के तहत उक्त सिपाही का लूट राज जारी है.

साहब आगे-आगे सिपाही पीछे से पहुंच जा रहा....

दरअसल, सिपाही के बिना सहायक आयुक्त का काम चल ही नहीं सकता. साहब जहां जाते हैं,पीछे से उक्त सिपाही को अपने यहां पदस्थापित करा लेते. यह खेल कई सालों से जारी है. इसके पहले साहब जिस जिले में थे, वहां भी यह जोड़ी कमाई में मामले में हीट थी. इस बार सहायक आयुक्त जिस महत्वपूर्ण जिले में पदस्थापित हैं, वहां तो यह कमाऊ पूत आतंक मचा रखा है. बताया जाता है कि आमलोगों से जबरन वसूली की जा रही. दारोगा-इंस्पेक्टर के मना करने के बाद भी उसकी ठसक ऐसी की, फर्क नहीं पड़ता. बेचारे दारोगा-इंस्पेक्टर करें तो क्या, सिपाही के सिर पर साहब का हाथ जो है. मन मसोस कर रह जा रहे. ऐसा नहीं कि जिस जिले में यह खेल किया जा रहा. वो राजधानी से बहुत दूर है, जहां की बात मुख्यालय नहीं पहुंच रही. सारी बात मुख्यालय पहुंचती है, पर....। 

उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त और उनके कमाऊ पूत के द्वारा खेला उस महत्वपूर्ण जिले में खेला जा रहा, जो काफी महत्वपूर्ण जिला है. सीमाई राज्य से सटा हुआ जिला है. शराब की इंट्री प्वाइंट वाला जिला है. ऐसे जिले में साहब के कमाऊ पूत का आतंक जारी है. समझ जाइए, शराबबंदी कानून को ऐसे अफसर-कर्मी सफल करा रहे हैं या विफल ? 

हाल में राजधानी में किया था बड़ा जलसा

बताया जाता है कि, साहब की पूरी व्यवस्था कमाऊ पूत(सिपाही) के ही जिम्मे है. अभी हाल में ही साहब (सहायक आयुक्त) ने राजधानी में शादी की शालगिरह पर बड़ा जलसा किया था. मैरेज हॉल में राजशाही व्यवस्था की गई थी. सैकड़ों गेस्ट शामिल हुए थे. मेहमानवाजी में पानी की तरह पैसे बहाये गए थे. वो पैसे किसी दूसरे ने नहीं बल्कि कमाऊ पूत ने ही खर्च किए थे. अब समझ जाइए,जिस सिपाही के भरोसे साहब हैं, उसका जलवा तो रहेगा. 

वैसे साहब भी कम नहीं हैं. शराबबंदी वाले बिहार में साहब ने भी जमकर माल बनाया है. विभाग के लोग बताते हैं कि साहब अब तक कई जिलों में महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं. शराबबंदी में साहब ने भी भ्रष्टाचार रूपी गंगोत्री में जमकर डूबकी लगाई है. पटना से लेकर दूसरे राज्यों में संपत्ति बनाई है. वैसे साहब की संपत्ति की कहानी अगली कड़ी में बतायेंगे, कैसे 2026 में राजधानी में प्रॉपर्टी अर्जित की है. वैसे सिपाही ने भी बड़ा जाल फैला रखा है. बताया जाता है कि इसने बिहार के साथ-साथ झारखंड में अपना कारोबार फैला रखा है. बड़े अधिकारियों को भी उपकृत करता है. 

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता