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WHO ने इबोला को घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, भारत ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी

WHO Health Alert: कांगो और युगांडा में बढ़ते इबोला संक्रमण को WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया, भारत ने प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की।

WHO Health Alert
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

WHO Health Alert: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में तेजी से बढ़ रहे इबोला वायरस संक्रमण को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित कर दिया है। दोनों देशों में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इसी बीच भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ाते हुए एडवाइजरी जारी की है।


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 24 मई को भारतीय नागरिकों को इबोला प्रभावित देशों — डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी की गई है जब WHO ने इबोला के बढ़ते प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) 2005 के तहत WHO ने 17 मई 2026 को इस स्थिति को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल माना। इसके बाद भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए यात्रा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने भी कांगो और युगांडा में फैल रहे बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के इबोला संक्रमण को “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ कॉन्टिनेंटल सिक्योरिटी” घोषित किया है।


WHO की आपातकालीन समिति ने 22 मई को सदस्य देशों को सलाह दी कि एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले बुखार या संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की पहचान की जा सके। साथ ही लोगों को उन इलाकों की यात्रा से बचने की भी सलाह दी गई है जहां वायरस की पुष्टि हुई है।


WHO के आंकड़ों के मुताबिक, 21 मई तक कांगो में 746 संदिग्ध मामले और 176 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं, दोनों देशों में अब तक 85 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें युगांडा के दो मामले भी शामिल हैं। इन मामलों में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण सूडान समेत पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक है। यही वजह है कि भारत ने इन देशों की यात्रा से बचने की सलाह दी है।


WHO के डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि इबोला के मामले अब केवल दूरदराज के इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि घनी आबादी वाले शहरों में संक्रमण फैलना बेहद चिंता का विषय है।


उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण और मौतों के मामले सामने आ रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि अस्पतालों के भीतर भी वायरस फैलने लगा है। WHO के मुताबिक, यदि स्वास्थ्य व्यवस्था के अंदर संक्रमण बढ़ता है तो स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।


इबोला एक गंभीर वायरल हेमरेजिक फीवर है, जो बुंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन से फैलता है। यह बीमारी बेहद घातक मानी जाती है और इसकी मृत्यु दर काफी अधिक होती है। फिलहाल इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। हालांकि भारत में अब तक इस स्ट्रेन का कोई मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी जरूरी एहतियाती उपाय अपनाए जा रहे हैं।


सरकार ने प्रभावित देशों में रह रहे या यात्रा कर रहे भारतीय नागरिकों से स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि अगली सूचना तक इन देशों की गैर-जरूरी यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता