DESK: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मामले की जांच के बीच उत्तराखंड के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कई अहम फैसले लिए हैं। ट्रस्ट ने मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते या अन्य बिना जेब वाले वस्त्र पहनना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय सुपरवाइजरी बोर्ड का गठन भी किया गया है।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच कर रही एसआईटी लगातार जांच आगे बढ़ा रही है। इस मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में भी चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
चढ़ावे की निगरानी करेगा सात सदस्यीय बोर्ड
मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की निगरानी और मंदिर की व्यवस्थाओं पर नजर रखने के लिए सात सदस्यीय सुपरवाइजरी बोर्ड का गठन किया है। इस बोर्ड में शेषमणि दुबे, पवन गिरी, द्वारिका प्रसाद मिश्र, विनय दुबे, राम भवन यादव, जनार्दन गुप्ता और चंदन बनर्जी को सदस्य बनाया गया है। बोर्ड का दायित्व मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था की निगरानी करना और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना होगा।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने कही यह बात
मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक चढ़ावा पूरी पारदर्शिता के साथ ट्रस्ट के खाते में जमा कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित होती है और मंदिरों की छवि को नुकसान पहुंचता है। रवींद्र पुरी ने यह भी कहा कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मामले में वास्तविक दोषियों की पहचान जांच एजेंसियां करेंगी। उन्होंने अपने स्तर पर यह दावा किया कि चंपत राय को इस मामले में फंसाया गया है।
दूसरी अखाड़ा परिषद पर भी उठाए सवाल
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने दूसरी अखाड़ा परिषद के गठन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी परिषद को आठ अखाड़ों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें बड़ा उदासीन पंचायती अखाड़ा, जूना अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा, नया उदासीन और आह्वान अखाड़ा शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार अर्द्धकुंभ को पूर्ण कुंभ के रूप में मान्यता दिलाने के प्रयासों में उन्होंने सबसे पहले समर्थन दिया था और आगामी नासिक एवं उज्जैन कुंभ की व्यवस्थाओं में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहेगी।





