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पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं ममता बनर्जी

पश्चिम Bengal के राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ममता बनर्जी सरकार समाप्त हो गई और 15 साल पुराना टीएमसी शासन खत्म हो गया।

बिहार न्यूज
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

 DESK: इस वक्त की बड़ी खबर पश्चिम बंगाल से आ रही है। जहां बड़ा संवैधानिक बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश राज्यपाल आर.एन.रवि ने जारी किया है। कोलकाता गजट में प्रकाशित अधिसूचना के बाद ममता बनर्जी की सरकार संवैधानिक रूप से खत्म हो गयी है। साफ शब्दों में कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी अब सीएम पद पर नहीं रहीं। 



पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्यपाल आर.एन. रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b)के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया। 7 मई 2026 से यह प्रभावी माना जाएगा। जारी नोटिफिकेशन पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला के हस्ताक्षर भी है।


 यह फैसला सीधे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया। विधानसभा भंग होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार की पूरी कैबिनेट भी समाप्त हो गई है। साथ ही पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल में चल रही  तृणमूल कांग्रेस का शासन भी खत्म हो गया। अब वहां बीजेपी की सरकार बनने जा रही है।  


बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली लेकिन भारी हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देने का ऐलान कर दिया था। कोलकाता में प्रेस कांफ्रेंस कर ममता ने दो टूक कहा था कि वह लोकभवन में राज्यपाल के पास नहीं जाएंगी और ना ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगी।


 ममता ने यहां तक कह दिया कि विधानसभा चुनाव में मेरी नैतिक तौर पर जीत हुई है। इसलिए इस्तीफा देने का सवाल नहीं उठता। उनकी पार्टी चुनाव हारी नहीं है बल्कि हराई गई है। हम हारे नहीं बल्कि हमें हराया गया है। ममता ने ये भी कहा कि उनकी लड़ाई भाजपा से नहीं थी बल्कि चुनाव आयोग से थी। ममता बनर्जी के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया था। ऐसी स्थिति देश में कभी नहीं देखने को मिली थी।

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