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जेल की महिला अफसर को कैदी से हुआ प्यार, उम्रकैद काट चुके धर्मेंद्र संग रचाई शादी

सतना सेंट्रल जेल की असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट फिरोजा खातून ने उम्रकैद की सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह से शादी कर ली। जेल में शुरू हुई दोस्ती प्यार में बदली और दोनों ने समाज व मजहब की दीवारें तोड़कर विवाह रचा लिया।

मध्यप्रदेश न्यूज
प्यार अंधा होता है
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DESK: कहते हैं प्यार अंधा और बहरा दोनों होता है। जब किसी को प्यार हो जाता है तब उसे ना तो कुछ दिखाई देता है, और ना ही सुनाई देता है। वो तो बस अपनी धून में लगा रहता है। ऐसा ही प्यार सजा काट चुके एक कैदी को जेल की लेडी जेलर से हो गया। वह लेडी जेलर को अपना दिल दे बैठा। यह प्यार एकतरफा नहीं बल्कि दोतरफा प्यार है। इस अनोखी प्रेम कहानी की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है।


हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के सतना सेंट्रल जेल की महिला अधिकारी फिरोजा खातून और कैदी धर्मेंद्र सिंह की, जिनकी प्रेम कहानी के किस्से जानकर लोग भी हैरान हैं। उम्रकैद की सजा और मजहब की दीवारें पार कर दोनों एक दूसरे के हो गये। दोनों ने शादी रचाकर एक हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 


मिली जानकारी के अनुसार सतना सेंट्रल जेल की असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट फिरोजा खातून की मुलाकात जेल में धर्मेंद्र सिंह से हुई थी, जब वह जेल में वारंट इनचार्ज थीं। इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गयी। यह बातचीत कब प्यार में तब्दिल हो गयी। इस बात का पता दोनों को नहीं चल सका। दोनों ने इस प्यार को मुकाम देने के लिए शादी करने का फैसला ले लिया। 


दरअसल छतरपुर जिले के चंदला निवासी धर्मेंद्र सिंह 2007 में एक पार्षद की हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। धर्मेंद्र की सजा पूरी होने के करीब 14 साल बाद अच्छे आचरण के आधार पर उसे जेल से रिहा कर दिया गया था। 4 साल पहले वह जेल से रिहा हुआ जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। जब शादी का कार्ड छपाया गया तो धर्मेन्द्र ने अपना नाम कार्ड में बदल दिया ताकि लोग जान ना पाये कि वही धर्मेंद्र है जो जेल की सजा काटकर आया है।


 5 मई को हिन्दू रिति रिवाज से धर्मेंद्र और फिरोजा खातून की शादी हुई। इस अनोखी शादी की चर्चा इलाके में खूब हो रही है। लेकिन इस शादी से लड़की का परिवार खूश नहीं था, जिसके कारण फिरोजा की फैमिली का एक भी सदस्य इस शादी में शामिल नहीं हुआ। क्योंकि कि दूल्हा हिन्दू था, वो नहीं चाहते थे कि उनकी फिरोजा किसी हिन्दू से विवाह करें। जब फिरोजा के माता-पिता इस शादी में शामिल नहीं हुए तब विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा अपनी पत्नी के साथ मिलकर फिरोजा का कन्यादान किया।


 इस शादी में बजरंग दल के कई लोग मौजूद थे। धर्मेन्द्र और फिरोजा की शादी की खबर जैसे ही जेल में पहुंची। वहां के अधिकारियों, कर्मचारियों और जेल में बंद कैदियों ने नवविवाहित जोड़े को शादी की बधाई और शुभकामनाएं दी। इस शादी की चर्चा पूरे मध्यप्रदेश में हो रही है। 

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