DESK: आज जहां लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद नहीं करते हैं। लोग अलग होकर छोटे परिवार में रहना पसंद करते हैं। वहीं उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में सामाजिक एकता और पारिवारिक प्रेम की एक अनोखी मिसाल पेश की है। यहां एक ही परिवार में एक साथ छह शादियां कर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। एक विवाह ऐसा भी जो अब वायरल हो रहा है। यहां 5 दुल्हनें 5 भाईयों से शादी रचाने के लिए बारात लेकर उनके घर पहुंचीं और मंडप में बैठकर शादी के सात फेरे लिए. वहीं बेटों के घर में एक बेटी की विदाई भी की गई।
आमतौर पर दुल्हन अकेले विदा होती है, लेकिन उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र के एक गांव में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला, जहां एक साथ कई दुल्हनें विदा हुईं। यह अनोखी शादी खरासी गांवमें हुई। जहां एक ही परिवार के पांच भाइयों की शादी एक ही मंडप के नीचे संपन्न हुई। इतना ही नहीं, इसी अवसर पर उनकी बहन की भी शादी कर उसे विदा किया गया। इस सामूहिक विवाह को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग शादी समारोह में मौजूद रहे।
बता दें कि ये सभी दूल्हे जौनसारी समाज से संबंध रखते हैं। इस समाज की पारंपरिक ‘जोझोड़े’प्रथा के अनुसार दुल्हनें खुद बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचती हैं। जो परंपरा संयुक्त परिवार की एकता, आपसी सम्मान और सामंजस्य का प्रतीक मानी जाती है।
परिवार के पांचों भाई नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल की शादियां क्रमशः अन्नू, निक्की, पुनीता, निर्मला और आंचल के साथ हुईं। इस दौरान सभी दूल्हा-दुल्हन बेहद खुश नजर आए। वहीं, लड़के पक्ष ने अपनी बहन प्रियंका की शादी रणवीर सिंह के साथ कर धूमधाम से विदाई भी की।
स्थानीय भाषा में दुल्हनों को ‘जोझोल्टी’ कहा जाता है। जब पांचों दुल्हनें एक साथ अपने ससुराल खरासी गांव पहुंचीं, तो उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस ऐतिहासिक सामूहिक विवाह का आयोजन परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान ने किया, जो पेशे से ठेकेदार हैं। उनके इस कदम ने न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज में एकता और परंपरा की मजबूत मिसाल कायम की है।
ऐसी मान्यता है कि पांच पांडव भी जौनसार बावर इलाके में आए थे. यहां लाखामंडल क्षेत्र है. लाखामंडल को महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास से जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि अज्ञातवास में पांडवों ने यहीं समय बिताया था। लाखामंडल यानी लाक्षागृह का वर्णन महाभारत में है. इस लाखामंडल को कौरवों द्वारा पांडवों को जलाकर मारने के लिए बनाए लाक्षागृह से जोड़ा जाता है. अब इसके अवशेष बचे हैं।
जोजोड़ा विवाह में आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है और विवाह की रस्में पूरी करके दुल्हन को विदा कराकर लाता है. जौनसार बावर में दुल्हनें बारात लेकर दूल्हे के घर जाती हैं. विवाह की रस्में पूरी होने के बाद अगले दिन उसके साथ गए 15-20 बाराती वापस लौट जाते हैं. दो दिन बात दुल्हन अपने दूल्हे के साथ मायके जाती है. विवाह की इस परंपरा को जौनसार बावर में जोजोड़ा कहते हैं.







