Pending Traffic Challan: सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ट्रैफिक चालान और सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जिन वाहनों पर ई-चालान का जुर्माना बकाया है, उनके लिए कई जरूरी परिवहन सेवाएं रोकी जाएं और ऐसे वाहनों को सेंट्रल ट्रांसपोर्ट पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाए।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बकाया जुर्माने की वसूली हो और नियमों का जमीन पर प्रभावी तरीके से पालन किया जाए।
कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, जिन वाहनों पर ट्रैफिक जुर्माना बकाया है, उनके ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण और वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सेवाओं पर रोक लगाई जाए। रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन और पते में बदलाव जैसी सेवाओं पर भी तब तक विचार नहीं किया जाए, जब तक बकाया जुर्माना जमा नहीं हो जाता।
फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर भी रोक लगाने को कहा गया है। इसके अलावा ऐसे वाहनों के मालिकाना हक के हस्तांतरण और बिक्री पर रोक सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सेंट्रल ट्रांसपोर्ट पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बकाया जुर्माने वाले वाहन को तब तक PUC सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाना चाहिए, जब तक उसके सभी लंबित जुर्माने का भुगतान नहीं हो जाता। बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने और मौजूदा लाइसेंस को निलंबित करने पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि जारी किए गए ई-चालानों पर करीब 49,194 करोड़ रुपये की राशि बकाया थी। इसमें से अब तक करीब 26,175 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। पीठ ने कहा कि लाखों ई-चालान जारी करने भर से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। अधिकारियों को बकाया चालानों की वसूली और नियमों के वास्तविक अनुपालन पर भी ध्यान देना होगा।





