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“चूहे खा गए घूस के नोट”..सुप्रीम कोर्ट से आरोपी महिला CDPO को मिल गई बेल

बिहार में रिश्वत मामले में “नोट चूहे खा गए” दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। महिला CDPO को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति से राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है।

बिहार न्यूज
हाईकोर्ट का फैसला पलटा
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें रिश्वत के नोटों को लेकर अजीबोगरीब दलील दी गई। बिहार की एक महिला अधिकारी के खिलाफ घूस लेने के मामले में सुनवाई के दौरान कहा गया कि जब्त किए गए नोट चूहों द्वारा खा लिए गए। इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।


जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि इस तरह की स्थिति राज्य के लिए गंभीर राजस्व नुकसान का कारण बन सकती है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए आश्चर्य जताया कि आखिर कितनी जब्त राशि इसी तरह नष्ट हो जाती होगी।


दरअसल यह मामला बिहार में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) के पद पर कार्यरत रही अरुणा कुमार से जुड़ा है। अरुणा के ऊपर 10 हजार रुपये घूस लेने का आरोप है। इस संबंध में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस केस में ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और अलग-अलग धाराओं में 3 और 4 साल की सजा सुनाई।


हाईकोर्ट ने यह भी माना कि रिश्वत की रकम अदालत में पेश नहीं की जा सकी, क्योंकि नोट चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए थे। हालांकि, मालखाना रजिस्टर में रकम जमा होने का रिकॉर्ड मौजूद था, इसलिए केवल नोटों का न होना केस को कमजोर नहीं करता। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को भरोसेमंद नहीं माना और इस पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने फिलहाल सजा पर रोक लगाते हुए अरुणा कुमारी को जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी। फिलहाल इस टिप्पणी और फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों के संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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