ब्रेकिंग
Bihar MLC Election 2026 : अनंत सिंह की बगावत के बाद एक्शन में नीतीश कुमार, नीरज की जीत के लिए चला 'अमोघ अस्त्र'! ललन सिंह से मुलाकात के बाद क्या बदलेगा खेल?अनंत-नीरज की लड़ाई में क्यों चुप हैं नीतीश कुमार? ‘पंच परमेश्वर’ बनने से क्यों बच रहे JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कहीं यह सोची-समझी रणनीति तो नहीं?Bihar News : डायल-112 टीम पर हमला पड़ेगा महंगा, थानेदार पर होगी कार्रवाई; बिहार पुलिस मुख्यालय का सख्त आदेशBihar News : ‘पार्टी में बर्तन बजते रहते हैं’, अनंत-नीरज विवाद पर संजय झा ने संभाला मोर्चा; ललन सिंह को लेकर भी दिया जवाबBihar News: बिहार में 5 साल में लगेंगे 10 हजार उद्योग, CM सम्राट ने बताया बड़ा लक्ष्यBihar MLC Election 2026 : अनंत सिंह की बगावत के बाद एक्शन में नीतीश कुमार, नीरज की जीत के लिए चला 'अमोघ अस्त्र'! ललन सिंह से मुलाकात के बाद क्या बदलेगा खेल?अनंत-नीरज की लड़ाई में क्यों चुप हैं नीतीश कुमार? ‘पंच परमेश्वर’ बनने से क्यों बच रहे JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कहीं यह सोची-समझी रणनीति तो नहीं?Bihar News : डायल-112 टीम पर हमला पड़ेगा महंगा, थानेदार पर होगी कार्रवाई; बिहार पुलिस मुख्यालय का सख्त आदेशBihar News : ‘पार्टी में बर्तन बजते रहते हैं’, अनंत-नीरज विवाद पर संजय झा ने संभाला मोर्चा; ललन सिंह को लेकर भी दिया जवाबBihar News: बिहार में 5 साल में लगेंगे 10 हजार उद्योग, CM सम्राट ने बताया बड़ा लक्ष्य

Salary vs pension: सरकारी वेतन नहीं, अब पेंशन बन गई सबसे बड़ी जिम्मेदारी! 8वें वेतन आयोग पर सवाल?

Salary vs pension: केंद्र सरकार के बजट दस्तावेजों में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अब पेंशन पर खर्च, सैलरी से अधिक हो गया है। 2023-24 से यह ट्रेंड शुरू हुआ और 2025-26 तक जारी रहने की संभावना है, जिससे 8वें वेतन आयोग पर असर पड़ सकता है।

तन, पेंशन, बजट, केंद्र सरकार, आठवां वेतन आयोग, सरकारी कर्मचारी, सैलरी, पेंशन खर्च, वेतन खर्च, केंद्र सरकार बजट, salary, pension, budget, central government, 8th pay commission, government employees, e
केंद्र सरकार के लिए पेंशन बन गई सबसे बड़ी जिम्मेदारी
© Google
Nitish Kumar
Nitish Kumar
3 मिनट

Salary vs pension: केंद्र सरकार के ताजा बजट प्रोफाइल से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। अब सरकार का पेंशन पर खर्च उसके वेतन खर्च से अधिक हो गया है। 2025-26 के बजट में पेंशन पर ₹2.77 लाख करोड़ जबकि वेतन पर ₹1.66 लाख करोड़ खर्च करने का अनुमान है। यह सिलसिला 2023-24 से शुरू हुआ और अब भी जारी है।


यह बदलाव 2023-24 से देखने को मिल रहा है, जब पहली बार पेंशन का खर्च वेतन से अधिक हुआ। तब से यह अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस ट्रेंड ने न सिर्फ सरकारी खर्च के ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि सरकारी नौकरियों की संख्या में कमी आई है या वेतन मद का पुनर्गठन किया गया है।


आज के दौर में जब युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरियों की तलाश है और लाखों उम्मीदवार UPSC, SSC, बैंक और रेलवे की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में सरकार द्वारा वेतन मद में कटौती और भत्तों को अलग श्रेणी में डालने की नीति पर सवाल उठते रहें  हैं।


सरकार ने भत्तों को 'वेतन' से अलग कर 'अन्य भत्तों' की श्रेणी में गिनना शुरू कर दिया है। इससे कुल खर्च में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन 'वेतन' घटता हुआ दिखाई दे रहा है। इससे आने वाले 8वें वेतन आयोग पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिसे 2027 से लागू किया जाना है। अगर सरकार वेतन में वृद्धि की जगह भत्तों को प्राथमिकता देती रही, तो यह नई भर्ती करने वाले कर्मचारियों के लिए फायदेमंद नहीं होगा। इसके साथ ही, यह सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है कि क्या वह वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करेगी या नहीं।


वर्तमान भारत की युवा आबादी, जो सरकारी रोजगार को सुरक्षित भविष्य मानती है, ऐसे बदलावों से प्रभावित हो सकती है। इस आर्थिक नीति में पारदर्शिता और स्थायित्व को लेकर बहस और बढ़ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब देश को रोजगार, विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मजबूत रणनीति की जरूरत है। सरकार की इस नई प्रवृत्ति ने कर्मचारियों के बीच चिंता भी बढ़ा दी है कि कहीं वेतन वृद्धि के बजाय भत्तों के जरिए भुगतान की नीति को आगे न बढ़ाया जाए। ऐसे में अब सबकी निगाहें 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट और उसके लागू होने की प्रक्रिया पर टिक गई हैं।