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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका, अब सिर्फ इतने सिलेंडर पर ही मिलेगी सब्सिडी

PM Ujjwala Yojana: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका देते हुए केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। हालांकि प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी।

PM Ujjwala Yojana
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

PM Ujjwala Yojana: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को बड़ा झटका देते हुए सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में भारी कटौती कर दी है। हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार ने योजना के नियमों में बदलाव करते हुए सब्सिडी का दायरा सीमित कर दिया है।


नए नियमों के अनुसार अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में केवल पहले चार एलपीजी रिफिल पर ही 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से मिलेगी। इससे पहले लाभार्थियों को सालाना 9 सिलेंडरों पर यह सब्सिडी दी जाती थी।


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे। बाद में इसकी संख्या घटाकर 9 कर दी गई थी और अब इसे घटाकर केवल 4 सिलेंडर कर दिया गया है। हालांकि प्रति सिलेंडर मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


इस बदलाव के बाद एक लाभार्थी को मिलने वाली अधिकतम वार्षिक सहायता 1,200 रुपये रह जाएगी। पहले 9 सिलेंडरों पर 300 रुपये की सब्सिडी के हिसाब से लाभार्थियों को सालाना 2,700 रुपये की सहायता मिलती थी। नए नियम के बाद यह सहायता 1,200 रुपये तक सीमित हो जाएगी, यानी लाभार्थियों को सालाना 1,500 रुपये कम मिलेंगे।


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में मोदी सरकार ने की थी। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना और महिलाओं को धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाना था।


पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, योजना के तहत अब तक 10.5 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सरकार ने एलपीजी को किफायती बनाए रखने के लिए मई 2022 में 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक सरकार एलपीजी सब्सिडी पर 52,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है।


सरकार का कहना है कि उज्ज्वला परिवारों की औसत वार्षिक गैस खपत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा के अनुसार संशोधित पात्रता वास्तविक घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप तय की गई है। सरकार ने वैश्विक स्तर पर एलपीजी की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में तनाव के कारण तेल एवं गैस बाजार पर बढ़ते दबाव का भी हवाला दिया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों का दावा है कि वे हर घरेलू गैस सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।


वर्तमान में आम उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर 942 रुपये का है। वहीं उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले चार सिलेंडरों के लिए 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद 642 रुपये का भुगतान करना होगा। सरकार का कहना है कि संशोधित सब्सिडी व्यवस्था से वित्तीय बोझ कम होगा, जबकि एलपीजी पर निर्भर गरीब परिवारों को सहायता मिलती रहेगी। हालांकि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती से लाखों उज्ज्वला लाभार्थियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता