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बालेन सरकार का नया फरमान: भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के उपयोग पर लगाई रोक, भारत-नेपाल के “बेटी-रोटी” संबंधों पर बड़ा आघात

Nepal Indian vehicle ban: नेपाल में भारतीय नंबर प्लेट वाहनों पर नए प्रतिबंध से मधेश क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. सीमा पर रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ गईं है और भारत-नेपाल रिश्तों पर असर की आशंका जताई जा रही है.

Nepal Indian vehicle ban
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Nepal Indian vehicle ban: नेपाल में नई सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों ने भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व में सरकार ने भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के उपयोग पर रोक लगा दी है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव और नाराज़गी का माहौल बन गया है।


मधेश क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हैं। भारत से जुड़े पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों के बीच अब इन नए नियमों ने खटास पैदा कर दी है। जो वाहन कभी रिश्तेदारों द्वारा उपहार के रूप में खुशी लेकर आए थे, वे अब लोगों के लिए बोझ बनते जा रहे हैं। ऐसे वाहनों का उपयोग बंद होने से लोग असमंजस में हैं कि उनका क्या किया जाए।


सरकार ने न केवल भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगाया है, बल्कि भारत से आने वाले लोगों के लिए भी साल में केवल 30 दिनों की एंट्री की सीमा तय कर दी है। इस सख्ती को भारत-नेपाल के पारंपरिक “बेटी-रोटी” संबंधों पर आघात के रूप में देखा जा रहा है। यह समस्या केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि मधेश के अधिकांश परिवार इससे प्रभावित हैं। इसके अलावा, अब भारत से आने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भी नेपाल में कर (भंसार) देना पड़ रहा है, जिससे उपहार लेना भी कठिन हो गया है।


इस फैसले के खिलाफ नेपाल के भीतर भी आवाजें उठने लगी हैं। कोड़ेना के मेयर रूपेश कुमार ने सरकार को पत्र लिखकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच केवल सीमा ही नहीं, बल्कि सदियों पुराने धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध भी हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में विवाह, व्यापार और आवागमन हमेशा से सहज रहा है, और दहेज में भारतीय वाहनों की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।


अब तक सीमावर्ती नागरिक 25 किलोमीटर तक स्वतंत्र रूप से आवाजाही करते रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें पूरी होती थीं। लेकिन नए प्रतिबंधों ने उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है और आपसी संबंधों में कड़वाहट बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है।


मेयर रूपेश कुमार ने नेपाल सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और सीमित क्षेत्र में भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों को पहले की तरह अनुमति देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो इसका असर दोनों देशों के बीच वैवाहिक संबंधों, सामाजिक सौहार्द और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता