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राहत भरी खबर: भारत को मिला डेंगू का पहला वैक्सीन, जाने कैसे लगेगी डोज?

Dengue Vaccine: भारत को पहला डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga’ मिला है, जो चारों प्रकार के वायरस से सुरक्षा देता है और डेंगू की रोकथाम में अहम कदम माना जा रहा है।

Dengue Vaccine
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Dengue Vaccine: भारत में हर साल बढ़ते डेंगू के मामलों के बीच अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। देश को अपना पहला डेंगू वैक्सीन मिल गया है, जिसे रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 में जहां करीब 44 हजार मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2023 और 2024 में यह संख्या 2.3 लाख से अधिक पहुंच गई। 2025 में भी नवंबर तक 1.13 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामले रिपोर्ट ही नहीं हो पाते।


भारत में TAK-003 वैक्सीन, जिसे Qdenga के नाम से जाना जाता है, को मंजूरी दे दी गई है। इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की विशेषज्ञ समिति ने 4 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोग की अनुमति दी है। इस वैक्सीन का विकास जापान की टाकेडा फार्मास्युटिकल कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया है। इस वैक्सीन की खास बात यह है कि इसे लेने के लिए यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ हो या नहीं। 


यह चारों प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है, जिससे यह अधिक व्यापक सुरक्षा देती है। यह वैक्सीन दो डोज में दी जाएगी, जिनके बीच तीन महीने का अंतर होगा। क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि यह वैक्सीन चार साल से अधिक समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना है जहां डेंगू का खतरा अधिक है।


विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बड़ी आबादी डेंगू जोखिम क्षेत्र में आती है, ऐसे में यह वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह वैक्सीन डेंगू के खतरे को कम जरूर करेगी, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती। डेंगू की गंभीरता अक्सर शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है, खासकर दूसरी बार संक्रमण होने पर।


अच्छी बात यह है कि इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए टाकेडा कंपनी ने हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिससे भविष्य में इसकी उपलब्धता और कीमत दोनों बेहतर होने की उम्मीद है। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ वैक्सीन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई, समय पर जांच और उचित इलाज भी उतना ही जरूरी है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता