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CJI सूर्यकांत का बड़ा निर्देश, जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों की पहले होगी जांच

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों से कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत ने जांच समिति को इन शिकायतों की प्राथमिकता से जांच...

CJI सूर्यकांत का बड़ा निर्देश, जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों की पहले होगी जांच
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Ramakant kumar
4 मिनट

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले को उच्चस्तरीय जांच समिति प्राथमिकता के आधार पर देखेगी. उन्होंने बताया कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों पर समिति जल्द ही अंतरिम रिपोर्ट भी सौंप सकती है.


महिला प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर स्वतः संज्ञान की मांग

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों का मुद्दा उठाया. उन्होंने अदालत से मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की.


अधिवक्ता ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं और छात्राओं ने पुलिसकर्मियों द्वारा कथित गलत व्यवहार और छेड़छाड़ की शिकायतें सामने रखी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आए ऐसे दावों का भी अदालत के सामने जिक्र किया.


उच्चस्तरीय जांच समिति करेगी जांच

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अलग से रिट याचिका भी दाखिल की गई है. वहीं जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति को इन शिकायतों की जांच करने का निर्देश दिया गया है.


अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की अलग से जांच कराने और इसके लिए किसी जिला जज की नियुक्ति करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाएं सीधे ऐसे अधिकारी के सामने अपनी शिकायत दर्ज करा सकें.


इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस मुद्दे का अदालत के सामने बार-बार उल्लेख किया गया है और जांच समिति से ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने को कहा गया है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति के चेयरपर्सन को शिकायतों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की छूट दी गई है.


पांच सदस्यीय समिति कर रही जांच

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और अन्य आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं.


समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई सदस्य हैं.


समिति को 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच करनी है. प्रदर्शनकारी छात्र नीट और अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.


लक्षित हिंसा और उत्पीड़न की भी होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देने को कहा है. इनमें लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित छेड़छाड़ से जुड़े आरोप शामिल हैं.


अदालत ने इन मामलों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जांच करने पर जोर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी और समिति की अंतरिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.