1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 08 Jan 2026 06:02:12 PM IST
बिहार से है IPAC का कनेक्शन - फ़ोटो social media
DESK: कोलकाता में इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की एक छापेमारी के बाद भारी सियासी घमासान मच गया है. गुरुवार की सुबह ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की. इसके बाद ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर पहुंच गयीं और वहां से फाइल उठा कर ले गयीं. प्रतीक जैन को ममता बनर्जी का चुनावी रणनीतिकार बताया जाता है.
खास बात ये है कि प्रतीक जैन और उनके फर्म IPAC का बिहार से भी कनेक्शन है. इस फर्म से बिहार चुनाव से पहले एक पार्टी को मोटी राशि दी थी. अब ये मांग की जा रही है कि ईडी उस मामले की भी जांच करे. अगर ऐसा हुआ तो बिहार के एक नेता पर शिकंजा कस सकता है.
बता दें कि ईडी ने आज IPAC के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. कोलकाता में इस संस्था के ऑफिस के साथ साथ डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा गया. इसे छापेमारी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को बेचैन कर दिया. ममता बनर्जी ने छापेमारी के बाद कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को प्रतीक जैन के आवास पर भेजा. कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं. ममता ने प्रतीक जैन के घर पर पड़े एक फाइल को उठा लिया और वहां से निकल गयीं. इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं. उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं.
हालांकि ED ने कहा है कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी सबूतों के आधार पर किए जा रहे हैं. ये किसी राजनीतिक दल से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में कार्रवाई की जा रही है. ईडी ने बताया है कि कैश जनरेशन, हवाला ट्रांसफर से जुड़े मामलों की छानबीन की जा रही है. ईडी ने ममता बनर्जी पर छापेमारी के दौरान अवैध दखल देने और दस्तावेज छीनने के आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर किया है.
बिहार से है IPAC का कनेक्शन
दरअसल जिस IPAC के ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की है, उसका कनेक्शन बिहार से है. IPAC की स्थापना प्रशांत किशोर ने की थी. प्रतीक जैन इस संस्था के को फाउंडर थे. प्रशांत किशोर ने इसी संस्था के जरिये 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के लिए रणनीति तैयार की थी. बाद में बिहार में राजनीति के लिए प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीतिकार के काम से सन्यास लेने का ऐलान किया और IPAC से खुद को अलग कर लिया. इसके बाद इस संस्था में प्रतीक जैन समेत तीन डायरेक्टर बनाये गये थे.
जनसुराज को दिया था 60 करोड़ रूपये
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने IPAC को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि IPAC ने बिहार चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को 60 करोड़ रूपये दिये थे. जायसवाल ने कहा कि IPAC चुनावी रणनीति बनाने का काम करती है और उसके बदले पार्टियों .या नेताओं से पैसे लेती है. लेकिन उसने प्रशांत किशोर से पैसा लेने के बजाय 60 करोड़ रूपये अपने पास से दे दिये.
संजय जायसवाल ने आरोप लगाया है कि IPAC अवैध पैसे के लेन-देन का जरिया है और इसके तार प्रशांत किशोर से जुड़े हैं. तभी प्रशांत किशोर की पार्टी को कई कंपनियों से पैसे मिले. जिस कंपनी के पास 10 करोड़ की पूंजी नहीं है उसने प्रशांत किशोर की पार्टी को 10 करोड़ का चंदा दे दिया. ईडी को ऐसे सारे मामलों की जांच करनी चाहिये.