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मेडिकल कॉलेजों में अब ‘कैमरों का कड़ा पहरा’: गायब डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई, PG मान्यता रद्द होने का खतरा

देशभर के मेडिकल कॉलेजों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने नए सख्त नियम लागू किए हैं। अब डॉक्टरों की उपस्थिति से लेकर पीजी पढ़ाई तक हर चीज पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इस फैसले का असर बिहार सहित कई राज्यों के मेडिकल संस्थानों पर साफ तौर पर देखने को मिल

मेडिकल कॉलेजों में अब ‘कैमरों का कड़ा पहरा’: गायब डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई, PG मान्यता रद्द होने का खतरा
Tejpratap
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Bihar News: देशभर के मेडिकल कॉलेजों में अब अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जहां NMC यानी नेशनल मेडिकल कमीशन ने डॉक्टरों की उपस्थिति और पीजी पढ़ाई की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं और अब कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरों के जरिए डॉक्टरों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।


सीसीटीवी से होगी सख्त निगरानी

अब मेडिकल कॉलेजों में लगे कैमरे सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डॉक्टरों की उपस्थिति और कामकाज की निगरानी भी करेंगे, और यदि कोई डॉक्टर तय समय पर ड्यूटी पर मौजूद नहीं पाया गया तो संबंधित विभाग की पीजी मान्यता तक रद्द की जा सकती है, जिससे संस्थानों में हड़कंप मच गया है।


सुबह 9 से शाम 4 बजे तक अनिवार्य उपस्थिति

नए नियमों के तहत डॉक्टरों को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कॉलेज में मौजूद रहना अनिवार्य कर दिया गया है और उनकी उपस्थिति सीसीटीवी के जरिए रिकॉर्ड की जाएगी, वहीं मुजफ्फरपुर के Sri Krishna Medical College and Hospital (एसकेएमसीएच) समेत अन्य संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कैमरा सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त रखें।


पीजी मान्यता के लिए कड़े मानक

एनएमसी ने यह भी साफ कर दिया है कि मेडिकल कॉलेजों में कम से कम 80 प्रतिशत बेड पर मरीजों का भर्ती होना जरूरी है, अन्यथा पीजी कोर्स की मान्यता नहीं दी जाएगी, साथ ही कुल बेड का 15 प्रतिशत हिस्सा आईसीयू में पीजी ट्रेनिंग के लिए आरक्षित रखना भी अनिवार्य किया गया है।


डिजिटल रिकॉर्ड और नई व्यवस्था

अब हर मरीज का पूरा डेटा डिजिटल फॉर्मेट में रखना होगा, जिसमें ओपीडी, लैब टेस्ट और इलाज से जुड़ी जानकारी शामिल होगी और इसे हर महीने एनएमसी को भेजना होगा, इसके अलावा कॉलेज के भवन, लाइब्रेरी, लैब और अन्य सुविधाओं को भी तय मानकों के अनुसार विकसित करना अनिवार्य कर दिया गया है।


ABHA ID भी जरूरी

अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों की ABHA ID बनाना भी अनिवार्य किया गया है, जिससे उनका मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और डिजिटल रूप में उपलब्ध रह सके।


क्यों लिया गया यह फैसला?

दरअसल लंबे समय से मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में NMC ने यह सख्त कदम उठाया है ताकि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया जा सके और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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