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ट्रेन में छिपा था मासूमों का काफिला… 163 बच्चों की तस्करी का भंडाफोड़, बिहार के 8 तस्कर गिरफ्तार

Bihar News: मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर एक ही ट्रेन से 163 नाबालिग बच्चों के संदिग्ध हालात में मिलने के बाद जो चौंकाने वाला सच सामने आया, उसने बिहार से जुड़े एक बड़े और सुनियोजित मानव तस्करी नेटवर्क की गहरी परतों को उजागर कर दिया। जानिए...

ट्रेन में छिपा था मासूमों का काफिला… 163 बच्चों की तस्करी का भंडाफोड़, बिहार के 8 तस्कर गिरफ्तार
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार से जुड़े एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का चौंकाने वाला खुलासा मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर हुआ है, जहां एक ही ट्रेन से 163 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया। यह बच्चे बिहार के अलग-अलग इलाकों, खासकर अररिया जिले से लाकर महाराष्ट्र भेजे जा रहे थे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि बच्चों की तस्करी का नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला हुआ है।


बताया जा रहा है कि पटना-पूर्णा एक्सप्रेस में सवार इन बच्चों को बेहद संदिग्ध हालात में यात्रा कराई जा रही थी। आरपीएफ और जीआरपी को पहले से गुप्त सूचना मिली थी कि बड़ी संख्या में बच्चों को बिना किसी वैध कागजात के बाहर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही कटनी स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रेन को रोका और छापेमारी शुरू की।


जांच के दौरान जो सामने आया, वह बेहद हैरान करने वाला था। ट्रेन के अलग-अलग कोचों में इन बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। कई बच्चे डरे हुए थे, कुछ रो रहे थे और कई को यह तक नहीं पता था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। बच्चों की उम्र महज 6 से 13 साल के बीच बताई जा रही है, जिससे इस पूरे मामले की गंभीरता और भी बढ़ जाती है।


प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इन सभी बच्चों को बिहार के अररिया जिले और आसपास के क्षेत्रों से इकट्ठा किया गया था। तस्करों का मकसद इन्हें महाराष्ट्र के लातूर ले जाकर मजदूरी करवाना था। आशंका जताई जा रही है कि बच्चों से बंधुआ मजदूरी या अन्य गैरकानूनी काम कराए जाने की योजना थी।


इस पूरे ऑपरेशन को आरपीएफ कटनी के निरीक्षक वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। शनिवार रात शुरू हुआ यह अभियान रविवार तड़के तक चला। पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की टीम ने एक-एक कोच की जांच कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि समय रहते कार्रवाई हो गई, जिससे किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो सका।


सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चों के साथ मौजूद लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। न तो बच्चों की पहचान से जुड़ा कोई कागज था और न ही यात्रा से संबंधित कोई उचित व्यवस्था। इससे साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित तस्करी का मामला है।


कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 8 तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो सभी बिहार के ही अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इन आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। कानून के तहत नाबालिगों की तस्करी गंभीर अपराध है, जिसमें लंबी सजा का प्रावधान है।


अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि बिहार में किन-किन लोगों की इस गिरोह से सांठगांठ है और कितने समय से यह अवैध धंधा चल रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि पहले भी इस तरह से बच्चों को बाहर भेजा गया है या नहीं।


बचाए गए सभी बच्चों को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, जहां उनके खाने-पीने और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से बच्चों के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उन्हें सुरक्षित घर भेजा जा सके।