ONGC Gas Leak: ONGC प्लांट में गैस लीक के बाद जोरदार धमाका, भयंकर आग से अफरा-तफरी; इलाके को खाली कराया गया

ONGC Gas Leak: आंध्र प्रदेश में ONGC से जुड़े कुएं में गैस लीक के बाद जोरदार धमाका हुआ है. धमाके के बाद प्लांट में भयंकर आघ लग गई है. आग की लपटों को देख हड़कंप मच गया है.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mon, 05 Jan 2026 05:46:12 PM IST

ONGC Gas Leak

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ONGC Gas Leak: आंध्र प्रदेश में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) से जुड़े एक कुएं में गैस लीक के बाद जबरदस्त धमाका हुआ है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुएं से आग की ऊंची लपटें उठती साफ दिखाई दे रही हैं। तेज धमाके और आग की वजह से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि अब तक किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है।


यह हादसा डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले में स्थित मोरी गांव के मोरी-5 कुएं में हुआ, जिसे दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा संचालित किया जा रहा था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गैस रिसाव और आग लगने की सूचना मिलते ही राजाहमुंद्री से ONGC के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए।


धमाके के बाद ONGC की पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई, जिससे गैस रिसाव का खतरा और बढ़ गया। आग इतनी भीषण थी कि पूरा इलाका काले धुएं और लपटों से घिर गया। एहतियातन प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 


इसके साथ ही बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है और रसोई गैस चूल्हों के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। घटना से जुड़े जो दृश्य सामने आए हैं, वे काफी भयावह हैं। वीडियो में कर्मचारी जान बचाने के लिए घटनास्थल से भागते हुए नजर आ रहे हैं।


बता दें कि ONGC की कृष्णा-गोदावरी डेल्टा बेसिन, पूर्वी गोदावरी जिला और आंध्र प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी है। कंपनी राजाहमुंद्री ऑनशोर एसेट और ईस्टर्न ऑफशोर एसेट के माध्यम से काम करती है। बंगाल की खाड़ी में स्थित ऑफशोर रिग्स और पूर्वी गोदावरी के ऑनशोर क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल और अन्य हाइड्रोकार्बन का उत्पादन किया जाता है।


ऑफशोर प्लेटफॉर्म से हाइड्रोकार्बन को सब-सी और ऑनशोर पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए ऑनशोर प्रोसेसिंग यूनिट्स तक पहुंचाया जाता है, जिनमें यानम (पुदुचेरी) और आंध्र प्रदेश का मल्लावरम शामिल है। प्रोसेसिंग के बाद गैस को राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क में भेजा जाता है, जबकि कच्चे तेल को आगे के शोधन के लिए अन्य स्थानों पर ट्रांसफर किया जाता है।