1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mon, 26 Jan 2026 05:54:08 PM IST
प्रतिकात्मक - फ़ोटो Google
Aadhaar Vision 2032: आधार के तकनीकी ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ‘Aadhaar Vision 2032’ नाम से तैयार किए जा रहे नए रोडमैप के तहत फिंगरप्रिंट आधारित पहचान की जगह फेशियल रिकग्निशन को प्राथमिक ऑथेंटिकेशन माध्यम बनाने की तैयारी है। इससे न केवल पहचान प्रक्रिया और तेज होगी, बल्कि तकनीकी फेलियर और धोखाधड़ी की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
करीब चार महीने तक चले मैराथन मंथन के बाद गठित विशेषज्ञ समिति ने ‘आधार विजन 2032’ का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस दस्तावेज को अगले महीने अंतिम रूप देकर मार्च में UIDAI को सौंपा जाएगा। इसके आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए आधार का नया तकनीकी ढांचा विकसित किया जाएगा।
इस विजन डॉक्यूमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है। उद्देश्य आधार को ज्यादा सुरक्षित, तेज और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। फिलहाल देश में रोजाना करीब 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें से लगभग 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए किए जाते हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर महीने 100 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन फेस रिकग्निशन के माध्यम से हों। एआई आधारित यह सिस्टम समय-समय पर खुद को अपडेट करता रहेगा, जिससे लोगों को बार-बार बायोमेट्रिक देने की परेशानी से राहत मिलेगी।
सरकार 18 करोड़ बच्चों और किशोरों के बायोमेट्रिक अपडेट को लेकर भी गंभीर है। दिसंबर तक करीब 5 करोड़ अपडेट पूरे हो चुके हैं। यह सुविधा सितंबर 2026 तक पूरी तरह निशुल्क जारी रहेगी, जिससे आधार डेटाबेस और अधिक सटीक व भरोसेमंद बनेगा।
UIDAI के साथ सरकार का मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है। अब 2032 तक के लिए नए अनुबंध की तैयारी चल रही है, ताकि आधार को भविष्य की डिजिटल जरूरतों के अनुरूप मजबूत किया जा सके। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को तैयार करने के लिए UIDAI चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी।
इसमें विवेक राघवन (Sarvam AI), धीरज पांडेय (Nutanix), डॉ. पी. पूर्णचंद्रन (अमृता यूनिवर्सिटी), प्रो. अनिल जैन (मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी) और आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स जैसे दिग्गज शामिल रहे। Aadhaar Vision 2032 सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करने की एक बड़ी और दूरदर्शी पहल है।