ब्रेकिंग
बिहार में बाढ़ का कहर जारी... 13 जिलों की 27 लाख आबादी प्रभावित, इन इलाकों में हालात बेकाबू; अब और बढ़ सकती है मुसीबतबिहार के इस रूट पर रेलयात्रियों के लिए जरूरी खबर, आज 10 MEMU ट्रेनें रहेंगी रद, कई एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला रूट... निकलने से पहले जरूर देखें अपडेटबिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी... अब दूध बेचने के पैसे के लिए नहीं लगानी होगी कहीं दौड़, सीधे बैंक खाते में आएगी रकमबिहार में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 19 जिलों में बारिश का अलर्ट; आंधी-वज्रपात को लेकर भी चेतावनीपटना में NIA की रेड: 20 लाख कैश के साथ एक शख्स गिरफ्तार, मोस्टवांटेड को भी अपने साथ ले गई टीमबिहार में बाढ़ का कहर जारी... 13 जिलों की 27 लाख आबादी प्रभावित, इन इलाकों में हालात बेकाबू; अब और बढ़ सकती है मुसीबतबिहार के इस रूट पर रेलयात्रियों के लिए जरूरी खबर, आज 10 MEMU ट्रेनें रहेंगी रद, कई एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला रूट... निकलने से पहले जरूर देखें अपडेटबिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी... अब दूध बेचने के पैसे के लिए नहीं लगानी होगी कहीं दौड़, सीधे बैंक खाते में आएगी रकमबिहार में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 19 जिलों में बारिश का अलर्ट; आंधी-वज्रपात को लेकर भी चेतावनीपटना में NIA की रेड: 20 लाख कैश के साथ एक शख्स गिरफ्तार, मोस्टवांटेड को भी अपने साथ ले गई टीम

BJP MLA Protest : बीजेपी विधायक को वोट मांगने पर ग्रामीणों ने खदेड़ा, बोले – “झूठ मत बोलिए विधायक जी” फिर कार्यकर्ता करने लगे यह काम

BJP MLA Protest : वैशाली जिले के दयालपुर पंचायत में बीजेपी विधायक अवधेश सिंह को वोट मांगने के दौरान ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। नाराज लोगों ने विकास कार्यों की कमी पर सवाल उठाते हुए उन्हें गांव से खदेड़ दिया।

BJP MLA Protest : बीजेपी विधायक को वोट मांगने पर ग्रामीणों ने खदेड़ा, बोले – “झूठ मत बोलिए विधायक जी” फिर कार्यकर्ता करने लगे यह काम
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

BJP MLA Protest : वैशाली जिले के दयालपुर पंचायत में चुनावी प्रचार के दौरान उस समय हंगामा मच गया, जब बीजेपी विधायक अवधेश सिंह को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विधायक जैसे ही गांव में वोट मांगने पहुंचे, स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और तीखे सवालों की झड़ी लगा दी। नाराज ग्रामीणों ने विधायक से कहा कि “अब वोट मांगने क्यों आए हैं, जब दस साल तक कभी हाल-चाल तक नहीं पूछा।”


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अवधेश सिंह अपने पूरे कार्यकाल में कभी भी जनता से मिलने नहीं आए। एक व्यक्ति ने कहा, “जब हम अपनी समस्याएं लेकर उनके पास गए थे, तब उनके बॉडीगार्ड ने हमें भगा दिया था। ऐसे नेता से जनता को क्या उम्मीद हो सकती है?” भीड़ में मौजूद कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विधायक केवल चुनाव के समय ही याद करते हैं, बाकी समय जनता उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।


गांववालों ने विधायक से विकास कार्यों का हिसाब मांगा। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में न तो सड़कों की मरम्मत हुई, न नई सड़कें बनीं। एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि विधायक ने बिना सड़क बनाए ही उसका उद्घाटन कर दिया और फोटो खिंचवाकर चले गए। लोगों ने कहा कि पिछले तीस सालों में इस इलाके में कोई नई सड़क नहीं बनी।


ग्रामीणों ने विधायक पर मंदिर के लिए फंड जारी करने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दस साल पहले विधायक ने मंदिर निर्माण के लिए धन न होने की बात कही थी, लेकिन अब अचानक फंड कैसे उपलब्ध हो गया? ग्रामीणों का कहना है कि बिना काम किए ही धन स्वीकृत दिखा दिया गया है।


जब माहौल गरमाने लगा तो विधायक अवधेश सिंह ने सरकार की योजनाओं और सिस्टम के बारे में समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी प्रशासनिक कारणों से हुई है। लेकिन जनता ने उनकी सफाई सुनने से इनकार कर दिया। जब विधायक ने ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ की बात करते हुए माहौल शांत करने की कोशिश की, तब लोगों ने और जोर से विरोध करना शुरू कर दिया।


स्थिति बिगड़ती देख विधायक के समर्थकों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस बीच हंगामा बढ़ता गया और विधायक को वहां से निकलना पड़ा। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए उन्हें गांव से बाहर तक खदेड़ दिया। इस घटना ने दयालपुर क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता की गहरी नाराजगी को उजागर कर दिया है। लोगों का कहना है कि हर चुनाव में नेताओं के वादे बड़े-बड़े होते हैं, लेकिन जीतने के बाद वे जनता से दूरी बना लेते हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि इस बार वे किसी ऐसे उम्मीदवार को वोट देंगे जो सच्चे अर्थों में जनता के बीच रहकर काम करे।


स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि अगर विधायक अपने क्षेत्र में नियमित रूप से आते और समस्याओं को सुनते, तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं। घटना के बाद से पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के असंतोष का प्रमाण बताया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि यह केवल कुछ लोगों की सुनियोजित साजिश है।