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बिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी... अब दूध बेचने के पैसे के लिए नहीं लगानी होगी कहीं दौड़, सीधे बैंक खाते में आएगी रकम

बिहार के लाखों पशुपालकों और दूध उत्पादकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब दूध बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी। पहले चरण में कितने किसानों को इसका लाभ मिलेगा और कब से

बिहार के 7 लाख दूध उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी... अब दूध बेचने के पैसे के लिए नहीं लगानी होगी कहीं दौड़, सीधे बैंक खाते में आएगी रकम
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar Milk Producers News: बिहार में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े पशुपालकों को अब दूध बेचने की राशि के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. कॉम्फेड की ओर से दूध की कीमत सीधे उत्पादकों के बैंक खाते में भेजने की नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इससे दूध की बिक्री के बाद भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और आसान हो जाएगी.


नई व्यवस्था के तहत प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के माध्यम से राशि भेजने के बजाय सीधे दूध उत्पादकों के बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा. इसके लिए प्राथमिक स्तर के दुग्ध उत्पादक संघ दूध विक्रेताओं की सूची संबंधित दुग्ध संघों को उपलब्ध कराएंगे. इस सूची में दूध उत्पादकों के बैंक खाते की जानकारी भी शामिल होगी.


पहले चरण में इस माह के अंत तक राज्य के सभी जिलों से जुड़े करीब 5 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के 50 हजार दूध उत्पादकों के खाते में सीधे राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राज्य के 22 हजार 416 दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 7 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा.


आठ दुग्ध संघों से जुड़े हैं 7 लाख से अधिक उत्पादक

वर्तमान में कॉम्फेड से बिहार के आठ दुग्ध संघ जुड़े हुए हैं. इनमें वैशाली पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ पटना, राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ बरौनी, तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ मुजफ्फरपुर, मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ समस्तीपुर, शाहाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ आरा, विक्रमशिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ भागलपुर, मगध दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ गया और कोशी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ सुपौल शामिल हैं.


इन दुग्ध संघों से जुड़े 7 लाख से अधिक दूध उत्पादक रोजाना बड़ी मात्रा में दूध उपलब्ध कराते हैं. इस दूध से सुधा ब्रांड के तहत विभिन्न दुग्ध उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचे जाते हैं.


दूध की कीमत सीधे खाते में जाएगी

कॉम्फेड के एमडी कपिल अशोक ने बताया कि राज्य के दूध उत्पादकों के बैंक खातों में सीधे राशि भेजने के लिए डीएटी यानी डायरेक्ट अकाउंट ट्रांसफर व्यवस्था लागू की जा रही है. इससे दूध उत्पादकों को भुगतान के लिए किसी स्तर पर अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.


उन्होंने बताया कि पहले चरण में 5 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े करीब 50 हजार दूध उत्पादकों को इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. इसके बाद राज्य के 7 लाख से अधिक दूध उत्पादकों के खातों में सीधे भुगतान किया जाएगा.


सुधा के लिए रोजाना होता है दूध का संग्रह

कॉम्फेड से जुड़े दुग्ध उत्पादकों की ओर से रोजाना बड़ी मात्रा में दूध का संग्रह किया जाता है. इस दूध का इस्तेमाल सुधा ब्रांड के तहत पैकेट वाले दूध के अलावा दही, आइसक्रीम, पनीर और मिल्क पाउडर जैसे उत्पाद तैयार करने में किया जाता है.


कॉम्फेड के अनुसार कुल संग्रहित दूध में करीब 70 प्रतिशत की बिक्री पाउच में दूध के रूप में होती है, जबकि बाकी दूध से अन्य दुग्ध उत्पाद तैयार किए जाते हैं. सीधे बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था लागू होने के बाद दूध उत्पादकों को उनकी बिक्री की राशि प्राप्त करने में सुविधा होगी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.