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Bihar Election 2025 : EC के डाटा से निकले दिलचस्प आंकड़े, इस वजह से कई सीटों पर बदले समीकरण; जानिए हरेक बात

बिहार चुनाव 2025 में कई सीटों पर बेहद करीबी मुकाबले देखे गए। पोस्टल बैलट के बड़े पैमाने पर रिजेक्ट होने से नतीजों पर असर पड़ा। नबीनगर, अगिआंव, संदेश और रामगढ़ में अंतर बेहद कम रहा।

Bihar Election 2025 :  EC के डाटा से निकले दिलचस्प आंकड़े, इस वजह से कई सीटों पर बदले समीकरण; जानिए हरेक बात
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कई विधानसभा सीटों पर बेहद रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कुछ सीटों पर तो अंतर इतना कम था कि पोस्टल बैलट के रिजेक्ट होने का असर सीधे नतीजों पर पड़ सकता था। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि इस बार पोस्टल वोटों की संख्या पहले की तुलना में काफी अधिक रही, लेकिन बड़ी संख्या में पोस्टल बैलट निरस्त भी किए गए। कुल मिलाकर 2,01,444 लोगों ने पोस्टल बैलट का इस्तेमाल किया, जिनमें से 23,918 बैलट रिजेक्ट हो गए। ऐसे में बेहद कम अंतर वाली सीटों पर यह मुद्दा गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।


नबीनगर सीट: 112 वोट से जीते चेतन आनंद, 132 पोस्टल वोट रिजेक्ट

औरंगाबाद जिले की नबीनगर विधानसभा सीट पर रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। जेडीयू उम्मीदवार चेतन आनंद, जो बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह के बेटे हैं और इस बार शिवहर की जगह नबीनगर से लड़े, उन्होंने केवल 112 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने आरजेडी के अमोद कुमार सिंह को हराया।


लेकिन इस सीट पर पोस्टल बैलट का डेटा और भी दिलचस्प रहा। यहां 812 लोगों ने पोस्टल वोट डाला, जिनमें से 132 वोट रद्द कर दिए गए। चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये वोट रिजेक्ट न होते, तो परिणाम बदल भी सकता था। इस सीट पर 4042 लोगों ने NOTA चुना, जो इस चुनाव में मतदाताओं की असंतुष्टि भी दर्शाता है।


अगिआंव सीट: 95 वोटों से हार सीपीआई(एमएल), 175 पोस्टल वोट रिजेक्ट

भोजपुर जिले की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अगिआंव सीट पर भी मुकाबला बेहद करीबी रहा। यहां बीजेपी के महेश पासवान ने सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के शिव प्रकाश रंजन को सिर्फ 95 वोटों के अंतर से हराया। इस सीट पर 1088 पोस्टल वोट पड़े थे, जिनमें से 175 वोट रिजेक्ट कर दिए गए। इतने बड़े पैमाने पर पोस्टल वोटों का निरस्त होना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है। यहां भी 3631 मतदाताओं ने NOTA दबाया, जो एक बड़ा आंकड़ा है।


संदेश सीट: 27 वोट से आरजेडी की हार, 360 पोस्टल वोट खारिज

बिहार की संदेश विधानसभा सीट पूरे राज्य में सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक रही। जेडीयू के राधा चरण साह ने आरजेडी के दीपू सिंह को सिर्फ 27 वोटों से हराया। इस सीट पर 1550 पोस्टल वोट पड़े, लेकिन इनमें से 360 वोट रद्द कर दिए गए—जो कुल पोस्टल वोट का लगभग 23% हिस्सा है। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर पोस्टल वोट खारिज न हुए होते, तो परिणाम पूरी तरह अलग हो सकते थे। इस सीट पर 4160 लोगों ने NOTA का विकल्प चुना।


रामगढ़ सीट: 30 वोटों से BJP हारी, 179 पोस्टल बैलट रिजेक्ट

कैमूर जिले की रामगढ़ सीट पर चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला। यहां बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सतीश कुमार सिंह यादव ने बीजेपी के अशोक कुमार सिंह को केवल 30 वोटों के अंतर से हराया। यह इस चुनाव की सबसे कम अंतर वाली हारों में से एक रही।


लेकिन यहां भी पोस्टल वोट विवाद का कारण बने। 1041 पोस्टल बैलट डाले गए, जिनमें से 179 बैलट रद्द कर दिए गए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि ये वोट मान्य होते, तो हार-जीत का अंतर पूरी तरह बदल सकता था। साथ ही, इस सीट पर 1154 मतदाताओं ने NOTA चुना, जो कुल मतदान का अहम हिस्सा है।


क्यों रिजेक्ट हो जाते हैं पोस्टल वोट?

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार कुछ सामान्य कारणों से पोस्टल बैलट रद्द किए जाते हैं फॉर्म 13A या 13B में गलती, जैसे अधूरा फॉर्म या गलत जानकारी मतपत्र पर गलत निशान, या एक से अधिक उम्मीदवार को वोट देना, मतदाता की पहचान स्पष्ट न होना,आवश्यक दस्तावेज या घोषणापत्र संलग्न न करना मतपत्र का क्षतिग्रस्त होना या निर्देशों का पालन न करना। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टल बैलट की प्रक्रिया जटिल होने के कारण आम मतदाता, खासकर बुजुर्ग और दिव्यांग, अक्सर छोटे-छोटे तकनीकी नियमों में चूक कर देते हैं, और उनका वोट रद्द हो जाता है।

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