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Bihar News: बिहार पुलिस की जबरन वसूली और धमकाने का बढ़ता तांडव, कब तक सहेंगी आम जनता के ये जुल्म?

Bihar News: बिहार के पूर्णिया में वर्दीवालों की करतूत सामने आई है, जहां रात के अंधेरे में वाहन चेकिंग के नाम पर पुलिसवालों ने आम नागरिक से 1.10 लाख रुपये लूट लिए। SP के एक्शन के बाद दारोगा समेत चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार कर लिए गए।

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गिरफ्तार पुलिसकर्मी
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Nitish Kumar
Nitish Kumar
5 मिनट

Bihar News:  पुलिस पर जनता की सुरक्षा का जिम्मा होता है, लेकिन पूर्णिया जिले में खाकी वर्दीधारी ही अपराध में लिप्त पाए गए। देर रात वाहन चेकिंग के नाम पर एक आम नागरिक से 1.10 लाख रुपये की जबरन वसूली करने के मामले में दारोगा अरुण कुमार झा समेत चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना श्रीनगर मार्ग की है, जहां पीड़ित अभिनंदन यादव के साथ यह वारदात हुई।


कार रोककर लूटा गया कैश, धमकाकर भेजा गया वापस

कसबा थाना क्षेत्र के मोहिनी गांव निवासी अभिनंदन यादव अपनी कार से रात 12 बजे कानकी जा रहे थे। चुन्नी उरांव चौक के पास एक पुलिस वाहन ने उन्हें रोका। कार की सीट पर रखा 1.10 लाख कैश देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की नीयत डोल गई। उन्होंने जबरन कैश उठा लिया और विरोध करने पर अभिनंदन को धमकाकर वहां से भगा दिया।


घटना से घबराए अभिनंदन यादव रात में ही के.हाट थाना पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी। उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों का हुलिया भी बताया, जिससे जांच में तेजी आई।शिकायत मिलते ही एसपी कार्तिकेय शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित की। शुरुआती साक्ष्य के आधार पर पुलिस वाहन के चालक अमन कुमार उर्फ गोलू को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान गोलू ने पूरी वसूली की बात स्वीकार की और अन्य आरोपियों के नाम बताए।


चालक से 1.10 लाख रुपये की बरामदगी के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दारोगा अरुण कुमार झा, सिपाही अनुज कुमार, सिपाही योगेंद्र पासवान और चालक अमन कुमार उर्फ गोलू को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।एसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि चारों आरोपियों को निलंबित कर विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने दोहराया कि पुलिस विभाग में ऐसे भ्रष्ट आचरण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि शिकायत करने की हिम्मत रखने वाले नागरिक न्याय पा सकते हैं।


यह मामला न केवल पूर्णिया पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करता है। इस तरह की वसूली और दबंगई से आम जनता पुलिस पर से भरोसा खो बैठती है। जहां पुलिस को जनता की सुरक्षा करनी चाहिए, वहीं कुछ पुलिसकर्मी अपना पद दुरुपयोग कर लोगों को डराने-धमकाने और उनके अधिकारों को ठेस पहुंचाने में लगे हैं।  विरोध करने पर पुलिस धमकाती है और भयभीत कर देती है। ऐसे मामलों से पुलिस विभाग की विश्वसनीयता खत्म होती है और कानून व्यवस्था कमजोर पड़ती है। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की कमी से स्थिति और बिगड़ती है।


यह मामला बिहार पुलिस की उन कई घटनाओं में से एक है, जो आम लोगों के साथ पुलिस के दमन और दबाव को उजागर करती हैं। जब पुलिस की भूमिका ही कानून व्यवस्था बनाए रखने की होती है, तब ऐसी घटनाएं जनता में डर और अविश्वास पैदा करती हैं। सवाल ये उठता है कि क्या बिहार पुलिस की इस कुप्रथा और दुराचार पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? आम जनता के लिए पुलिस का भय का माहौल खत्म करना और न्याय दिलाना ही किसी समाज की सच्ची तरक्की का पैमाना है। जब तक पुलिस अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभाएगी, तब तक आम नागरिक सुरक्षा के बजाय डर का सामना करते रहेंगे।


आखिर कब सुधरेगी पुलिस व्यवस्था?

अगर पुलिस विभाग ने इस प्रकार की घटनाओं को रोकना है तो सख्त निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है। भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। साथ ही आम जनता के लिए शिकायत दर्ज कराने के सुरक्षित और प्रभावी माध्यम बनाए जाने चाहिए ताकि लोग बिना डर के अपनी समस्या सामने ला सकें।


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