Patna NEET case: पटना के चर्चित NEET छात्रा मामले में पॉक्सो कोर्ट ने जांच कर रही देश की सबसे बड़ी एजेंसी CBI के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अब तक चार जांच अधिकारी (IO) बदले जा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी जिम्मेदारी से काम नहीं किया। जांच में निरंतरता की कमी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव ने केस को कमजोर कर दिया है, जिससे आरोपी के बचने की आशंका बढ़ गई है।
कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच की प्रक्रिया पर गहरा असंतोष जताया। बिहार पुलिस के दो और CBI के दो अधिकारियों ने अलग-अलग समय पर जांच की, लेकिन हर बार जांच नए सिरे से शुरू की गई। पिछले अधिकारियों के काम और नई जांच के बीच कोई तालमेल नहीं पाया गया। अदालत ने इसे ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ करार दिया। साथ ही CBI की स्टेटस रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट बताते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब जांच अधिकारी नहीं, बल्कि CBI के एसपी शपथपत्र के साथ रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
मामले का एक अहम पहलू यह है कि मुख्य आरोपी मनीष कुमार रंजन 15 जनवरी से जेल में है, लेकिन अब तक उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। पॉक्सो एक्ट के तहत 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होता है। यदि 15 अप्रैल तक चार्जशीट पेश नहीं की गई, तो आरोपी को तकनीकी आधार पर जमानत मिल सकती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महीनों की जांच के बावजूद एजेंसियां अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि छात्रा की मौत कैसे हुई। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज, हर स्तर पर जांच कमजोर नजर आई है। मृतका के कमरे से मिली दवाइयों और अन्य सामान में भी कई विसंगतियां सामने आई हैं।
मृतका के परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियां आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है कि साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ तक स्थापित नहीं की जा सकी है, जो इस पूरे मामले की जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



