ब्रेकिंग
IPL 2026: वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, 47 गेंदों में 96 रन की तूफानी पारी; कई रिकॉर्ड भी तोड़ेBihar News: बिहार में बस किराए में वृद्धि, परिवहन विभाग ने 10 से 15 फीसदी किया बढ़ोतरी; जानें..प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी: बिहार के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की होगी जांच; इस दिन से शुरू होगा विशेष अभियानबिहार के इस रेलखंड पर तीसरी लाइन परियोजना को मंजूरी, 962 करोड़ की लागत से होगा कायाकल्पविशेष अभियान में पटना पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, 5 अपराधियों को किया गिरफ्तारIPL 2026: वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, 47 गेंदों में 96 रन की तूफानी पारी; कई रिकॉर्ड भी तोड़ेBihar News: बिहार में बस किराए में वृद्धि, परिवहन विभाग ने 10 से 15 फीसदी किया बढ़ोतरी; जानें..प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी: बिहार के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की होगी जांच; इस दिन से शुरू होगा विशेष अभियानबिहार के इस रेलखंड पर तीसरी लाइन परियोजना को मंजूरी, 962 करोड़ की लागत से होगा कायाकल्पविशेष अभियान में पटना पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, 5 अपराधियों को किया गिरफ्तार

पटना NEET छात्रा मौत मामला: कोर्ट ने CBI पर की सख्त टिप्पणी, कहा- लापरवाही से कमजोर हुई जांच

Patna NEET case: पटना के NEET छात्रा केस में पॉक्सो कोर्ट ने CBI की जांच पर सख्त टिप्पणी करते हुए लापरवाही का आरोप लगाया है। चार्जशीट में देरी और कमजोर जांच के कारण आरोपी को राहत मिलने की संभावना जताई गई है।

Bihar Crime News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Patna NEET case: पटना के चर्चित NEET छात्रा मामले में पॉक्सो कोर्ट ने जांच कर रही देश की सबसे बड़ी एजेंसी CBI के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अब तक चार जांच अधिकारी (IO) बदले जा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी जिम्मेदारी से काम नहीं किया। जांच में निरंतरता की कमी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव ने केस को कमजोर कर दिया है, जिससे आरोपी के बचने की आशंका बढ़ गई है।


कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच की प्रक्रिया पर गहरा असंतोष जताया। बिहार पुलिस के दो और CBI के दो अधिकारियों ने अलग-अलग समय पर जांच की, लेकिन हर बार जांच नए सिरे से शुरू की गई। पिछले अधिकारियों के काम और नई जांच के बीच कोई तालमेल नहीं पाया गया। अदालत ने इसे ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ करार दिया। साथ ही CBI की स्टेटस रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट बताते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब जांच अधिकारी नहीं, बल्कि CBI के एसपी शपथपत्र के साथ रिपोर्ट दाखिल करेंगे।


मामले का एक अहम पहलू यह है कि मुख्य आरोपी मनीष कुमार रंजन 15 जनवरी से जेल में है, लेकिन अब तक उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। पॉक्सो एक्ट के तहत 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होता है। यदि 15 अप्रैल तक चार्जशीट पेश नहीं की गई, तो आरोपी को तकनीकी आधार पर जमानत मिल सकती है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महीनों की जांच के बावजूद एजेंसियां अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि छात्रा की मौत कैसे हुई। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज, हर स्तर पर जांच कमजोर नजर आई है। मृतका के कमरे से मिली दवाइयों और अन्य सामान में भी कई विसंगतियां सामने आई हैं।


मृतका के परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियां आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है कि साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ तक स्थापित नहीं की जा सकी है, जो इस पूरे मामले की जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता