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7 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में कैद रही महिला डॉक्टर, एनआईए चीफ बनकर ठगों ने रचा खौफनाक खेल और उड़ा लिए 1.55 करोड़

Cyber Crime: एक रिटायर्ड महिला डॉक्टर को साइबर ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंसाकर 7 दिनों तक डर में रखा और खुद को National Investigation Agency का अधिकारी बताकर 1.55 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। यह मामला देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड का गंभीर...

7 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में कैद रही महिला डॉक्टर, एनआईए चीफ बनकर ठगों ने रचा खौफनाक खेल और उड़ा लिए 1.55 करोड़
Ramakant kumar
4 मिनट

Cyber Crime: आजकल साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। देशभर में रोजाना हजारों लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। इसी कड़ी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर महिला डॉक्टर को साइबर अपराधियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से अपना निशाना बनाया। ठगों ने खुद को National Investigation Agency (एनआईए) का प्रमुख बताकर उन्हें सात दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और अंततः उनसे 1.55 करोड़ रुपये ठग लिए।


पीड़िता डॉक्टर जिया सुल्ताना, जो प्रोविंशियल मेडिकल सर्विसेज से सेवानिवृत्त हैं, इस पूरी घटना के दौरान अकेली थीं। ठगों ने उन्हें डर और भ्रम के ऐसे जाल में फंसाया कि वह चाहकर भी किसी से संपर्क नहीं कर सकीं। यह पूरा मामला तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” का है, जिसमें व्यक्ति को कानून का डर दिखाकर लगातार निगरानी में रखा जाता है।


घटना की शुरुआत 11 अप्रैल को एक वीडियो कॉल से हुई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस अधिकारी बताया और बेहद सख्त लहजे में कहा कि डॉक्टर के आधार कार्ड का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों में हुआ है। उसने यह भी कहा कि मामला गंभीर है और गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें तुरंत जांच प्रक्रिया में सहयोग करना होगा। डर का माहौल बनाने के लिए उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने यह बात किसी से साझा की, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


इसके बाद दूसरा व्यक्ति सामने आया, जिसने खुद को एनआईए का चीफ बताया। उसने इस पूरी प्रक्रिया को “आंतरिक जांच” का नाम दिया और कहा कि उनके बैंक खातों की जांच की जाएगी। इसी बहाने ठगों ने डॉक्टर को लगातार वीडियो कॉल पर रखा, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें और पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहें।


सात दिनों तक चले इस मानसिक दबाव के दौरान ठगों ने डॉक्टर से उनके बैंक खातों की पूरी जानकारी हासिल कर ली। 11 से 17 अप्रैल के बीच अलग-अलग बहानों और धमकियों के जरिए उनसे चार अलग-अलग खातों में कुल 1.55 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। यह ट्रांजैक्शन आरटीजीएस के जरिए किया गया, जिससे रकम तुरंत ठगों के खातों में पहुंच गई।


जब ठगों ने और पैसों की मांग शुरू की, तब डॉक्टर को शक हुआ। उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने एक करीबी को पूरी बात बताई। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।


मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उन्हें फ्रीज कराने की कोशिश की जा रही है। साथ ही कॉल करने वाले नंबरों की लोकेशन और कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं। शुरुआती जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का काम हो सकता है।