SARAN: सारण के मांझी थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शराबबंदी कानून को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शराब पीने की सूचना पुलिस को देने पहुंचे एक युवक ने पुलिसकर्मियों पर गाली-गलौज, बदसलूकी और धक्का देने का आरोप लगाया है। युवक का दावा है कि धक्के के कारण उसके पैर में चोट लगी।
मामला 16 अगस्त की शाम करीब 7 बजे का बताया जा रहा है। बक्सर जिले के रहने वाले प्रितम कुमार अपने ससुराल मांझी थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव आए हुए थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि मांझी प्रखंड कार्यालय परिसर में पानी की टंकी के पास कुछ युवक शराब पी रहे हैं।
प्रितम कुमार अपनी पत्नी के साथ इसकी सूचना देने मांझी थाना पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और बदसलूकी की। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी पर धक्का देने का आरोप है, जिससे प्रितम कुमार गिर गए और उनके पैर में चोट लग गई।
पीड़ित के मुताबिक, काफी देर तक थाना परिसर में विवाद चलता रहा, जिसके बाद पुलिस ने उनका आवेदन लिया। इस घटना के बाद शराबबंदी को सफल बनाने में आम लोगों की भूमिका और सूचना देने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सारण में इससे पहले भी शराब से जुड़ी सूचनाओं की गोपनीयता और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल सामने आते रहे हैं।
जनता बाजार थाना क्षेत्र में शराब की सूचना देने वाले एक युवक का नाम और मोबाइल नंबर कथित तौर पर सार्वजनिक होने का मामला सामने आया था। वहीं, तरैया थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान बरामद स्प्रिट की मात्रा को लेकर भी सवाल उठे थे। इस मामले में सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार ने जांच के निर्देश दिए थे।
सवाल अब यह है कि जब सरकार आम लोगों से शराबबंदी को सफल बनाने के लिए पुलिस को सूचना देने की अपील करती है, तो सूचना देने वाले लोगों के साथ पुलिस का व्यवहार क्या कैसा होना चाहिए? साथ ही, उनकी पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? इस पूरे मामले को देखकर ऐसा लगता है कि शायद शराबबंदी कानून को सफल बनाना पुलिस नहीं चाहती है। इसके पीछे कारण क्या है, यह जांच का विषय है। फिलहाल, पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
छपरा से पवन कुमार सिंह की रिपोर्ट





