Bihar News: बिहार के एक अनुमंडल पदाधिकारी ने सारी सीमाओं को लांघ दिया. पावर का खुल्लम खुल्ला दुरूपयोग किया. खास के पक्ष में जाकर काम किया. वरीय अधिकारियों को दिग्भ्रमित किया. अब जाकर उक्त अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
बेगूसराय के एसडीओ ने खुलेआम गड़बड़ी की
बेगूसराय सदर अनुमंडल के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी अनिल कुमार के खिलाफ जिलाधिकारी ने 9 अप्रैल और 10 अप्रैल 2026 को आरोप पत्र गठित कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा था. तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी अनिल कुमार पर गंभीर आरोप लगे थे. इन्होंने रैयती भूमि- संपत्ति विवाद में बिना किसी न्यायालय से एक्सक्यूसन आदेश प्राप्त किए बिना प्रोबेट केस के जजमेंट के आधार पर व्यक्ति विशेष के पक्ष में दखल कब्जा दिलाए जाने का आदेश पारित किया. अनुमंडल पदाधिकारी बेगूसराय ने रैयती भूमि विवाद में गलत मंशा से पक्षपात करते हुए अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर आदेश पारित किया. यह सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल है.
हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन किया
पटना हाई कोर्ट द्वारा रैयती भूमि विवाद में पारित स्थगन आदेश का अनुपालन जानकारी रहने के बाद भी अनुमंडल अधिकारी बेगूसराय सदर ने पालन नहीं किया. यह कृत्य भी इनके सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल माना गया. साथ ही एसडीओ अनिल कुमार ने अपने वरीय अधिकारियों को भी दिग्भ्रमित करने का काम किया.
जिलाधिकारी बेगूसराय की रिपोर्ट के बाद अनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई. जांच में पाया गया कि अनुमंडल पदाधिकारी अनिल कुमार ने पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित स्थगन आदेश के बावजूद विवादित स्थल पर पूर्व स्थिति बहाल करने का आदेश पारित किया. इस आदेश पर वरीय अधिकारी की मौन सहमति का उन्होंने न केवल तर्क दिया बल्कि उनके कृत्य से वरीय अधिकारियों को हाईकोर्ट में अवमानना का सामना करना पड़ा. ऐसे में इनके खिलाफ असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित किया गया है.
बता दें, बेगूसराय के तत्कालीन एसडीओ अनिल कुमार वर्तमान में युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थापित हैं.





