BIHAR: बिहार में सरकारी नौकरी के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरी परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा में धांधली के मामले में अब जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। आर्थिक अपराध इकाई की पड़ताल में अब तक 5 जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि 38 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण नकल कांड नहीं, बल्कि एक संगठित ‘सॉल्वर गैंग’ का खेल था, जो अभ्यर्थियों से 25 से 30 लाख रुपये लेकर परीक्षा पास कराने का दावा करता था। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क ने अलग-अलग जिलों में एक जैसा तरीका अपनाया, जिससे साफ है कि यह प्लानिंग के तहत किया गया घोटाला था।
मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, वैशाली और गया, इन पांच जिलों के परीक्षा केंद्रों से एक जैसे चीटिंग पैटर्न सामने आए हैं। कई अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ पकड़े गए, जिससे पूरे सिस्टम की पोल खुल गई। अब इस मामले की तह तक जाने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, जो मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू उस निजी एजेंसी की भूमिका है, जिसे परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। Sai Edu Care Private Limited नामक इस कंपनी को पहले ही National Testing Agency द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इसके बावजूद इसे इतनी अहम परीक्षा का जिम्मा सौंप दिया गया, अब यही सवाल सबसे बड़ा बनकर सामने खड़ा है।
EOU को शक है कि इस एजेंसी और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह पूरा खेल संभव हुआ। बायोमेट्रिक अटेंडेंस लेने वाले स्टाफ की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनसे अब सख्ती से पूछताछ की जा रही है।
बताया जा रहा है कि 14 से 21 अप्रैल के बीच आयोजित इस परीक्षा के दौरान ही गड़बड़ी के संकेत मिलने लगे थे। जैसे ही शिकायतें बढ़ीं, EOU ने जांच अपने हाथ में ले ली। अब आयोग से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है, जो इस परीक्षा और एजेंसी के चयन प्रक्रिया में शामिल थे।


